Monday, March 25, 2013
UP Aided School Recruitment : बेसिक के सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती रुकी
लखनऊ (ब्यूरो)। बेसिक शिक्षा परिषद के सहायता प्राप्त जूनियर हाई स्कूलों में स्पष्ट शासनादेश के बाद भी शिक्षकों की भर्ती रुकी हुई है। जबकि स्कूल प्रबंधन शिक्षकों की भर्ती के लिए बेसिक शिक्षा निदेशालय से लेकर शासन तक से गुहार लगा रहे हैं। इसके बावजूद इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। एडी बेसिक महेंद्र सिंह राणा का कहते हैं कि बेसिक शिक्षा परिषद से इस संबंध में स्पष्ट आदेश जारी होने के बाद ही बीएसए भर्ती की अनुमति दे सकेंगे।
सूबे में सहायता प्राप्त करीब 4100 जूनियर हाई स्कूल हैं। इन स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती के लिए स्कूल प्रबंधन कमेटी प्रस्ताव बनाकर बीएसए को भेजती है। फिर उनकी अनुमति के बाद विज्ञापन निकाल कर आवेदन मांगे जाते हैं लेकिन सूबे में आरटीई लागू होने के बाद भी शिक्षकों की भर्ती रोक दी गई
UPTET : 3 अप्रैल को होगी सुनवाई, दो या तीन बार में ही मामला निबटाने की तैयारी
इसी तरह अनुदेशक भर्ती भी अदालती कार्यवाही में फंसती नजर आ रही है। अभी अनुदेशक भर्ती के आवेदनों की अंतिम तिथि भी नहीं आ पायी थी कि जारी किये गये आवेदन प्रक्रिया के विज्ञापन के खिलाफ न्यायालय में याचिका दायर कर दी गयी। फिलहाल यदि शिक्षकों की भर्ती के लिए इसी तरह न्यायाल में उलझा के रखा गया तो उत्तर प्रदेश की प्राथमिक शिक्षा का हाल बेहाल होने में अब देर नहीं है
उधर एल टी' ग्रेड शिक्षकों की भर्ती भी कोर्ट में फंस गयी है
विवाद ये है की - साइंस टीचर की भर्ती में कोई भी पी जी डिग्री (एम् .ए आदि ) के क्वालिटी पॉइंट्स जोड़े जायेंगे (जैसा की भर्ती प्रक्रिया में हो रहा है )
या फिर सिर्फ साइंस विषय की पी जी डिग्री के |
लोगो के व्यंग्य भी ऐसे मामले को देखने पर मिल रहे हैं और ये मसला हास्य का बन गया है
Tuesday, March 12, 2013
UPTET : क ानून की व्याख्या में उलझी शिक्षकों की भर्ती
UPTET : क ानून की व्याख्या में उलझी शिक्षकों की भर्ती
News Sabhar : जागरण (Updated on: Tue, 12 Mar 2013 10:08 PM (IST))
इलाहाबाद : क्या सही है और क्या गलत, इसका फैसला तो अब हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ करेगी, लेकिन कानून की अलग-अलग व्याख्या ने शिक्षक भर्ती को उलझा दिया है। इससे नियुक्ति की बाट जोह रहे अभ्यर्थियों को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। प्रदेश में प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती के लिए टीईटी की अनिवार्यता शुरू से ही विवादों का घर रही है। पहले इसकी परीक्षा को लेकर विवाद और बाद में बीएड अभ्यर्थियों के मामले ने इसे और उलझा दिया। टीईटी की गाइडलाइन पूरे देश के लिए तय की गई थी, लेकिन राज्य सरकार ने शिक्षकों की भर्ती में बीएड अभ्यर्थियों के लिए राह खोलकर तमाम विवादों को जन्म दे दिया। बीएड अभ्यर्थियों के अपने तर्क हैं और उनकी एक बड़ी संख्या है इसलिए उन्हें उपेक्षित करना आसान नहीं था। इसी वजह से बड़ी संख्या में याचिकाएं अदालतों में दाखिल हुईं।
हाईकोर्ट में मतभिन्नता से अब यह मामला पूर्ण पीठ को संदर्भित हुआ है, जिससे एक निश्चित नतीजे पर पहुंचने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। वैसे अदालतों की अलग-अलग राय ने एक बहस भी सामने ला दी है कि किसी निश्चित गाइडलाइन को राज्य सरकार क्या तोड़-मरोड़ सकती है? जहां तक टीईटी का सवाल है तो कई राज्यों में ने इसे सफलतापूर्वक अपना लिया है और वहां शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया सही राह पर चल पड़ी है।
विशेष अपील भी खंडपीठ के हवाले
टीईटी की अनिवार्यता वाले एक अन्य एकल न्यायपीठ के फैसले के खिलाफ दाखिल विशेष अपील को भी पहले से गठित पूर्ण पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए भेज दिया गया। नवीन श्रीवास्तव व अन्य की विशेष अपील की सुनवाई कर रही इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुशील हरकौली तथा न्यायमूर्ति मनोज मिश्र की खंडपीठ ने प्रकरण को पूर्ण पीठ के समक्ष रखने के लिए मुख्य न्यायाधीश को संदर्भित कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि विशेष अपील का फैसला पूर्ण पीठ के द्वारा होने वाले फैसले से प्रभावित होगा। ऐसे में दोनों मामलों की अलग-अलग सुनवाई किए जाने का औचित्य नहीं है।
टीईटी पास होना अनिवार्य है, किंतु शासनादेश के तहत बीएड डिग्रीधारक भी सहायक अध्यापक बन सकते हैं। शर्त यह होगी कि नियुक्ति के बाद उन्हें 6 माह का प्रशिक्षण लेना होगा।
-खंडपीठ का आदेश
टीईटी पास होना सहायक अध्यापक भर्ती के लिए अनिवार्य है। जब टीईटी अभ्यर्थी नहीं होंगे तब आवश्यक होने पर बीएड की नियुक्ति की जा सकेगी किंतु वे भी बाद में टीईटी पास करेंगे।
-न्यायमूर्ति अरुण टंडन
टीईटी शिक्षक भर्ती के लिए ग्रीन कार्ड की तरह है। कानूनी उपबंधों की सही व्याख्या किया जाना जरूरी है इसलिए प्रकरण वृहदपीठ को संदर्भित किया जाए।
-न्यायमूर्ति एपी साही
शिक्षक भर्ती में बीए, बीएससी के साथ बीएड उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को शामिल करने के आदेश का अनुपालन किया जाए। एक माह के भीतर इस पर कार्यवाही हो।
-न्यायमूर्ति डीपी सिंह
हर्कोली सर लंच बाद केस सुनाने और फैसला सुनाने के पुरे मूड मे थे .... उन्होंने सारे अन्य केस परसों के लिए फिक्स कर दिया.............. सबसे पहले सीनीयर वकील होने के नाते खरे खड़े हुए ........ खरे ने बहस की सुरुआत करते हुए कहा की बरेली सेण्टर पर दूसरी पाली की omr , पहली पारी मे बाट दिया गया इस वजह से , प्रिंसिपल ने यू पी बोर्ड से मनुअल चेकिंग करने को कहा .............. यहाँ तक तो ठीक था ........ अचनाक्क्क्क्क्क क्क्क्क्क्क्क््क्क्क्क्क्क्क्क ..........खरे ने नॉन टेट का मुदा उठाते हुए लार्जेर बेंच मे नॉन टेट मैटर के जाने की बात कही (जो की एक दम अनावश्यक थी ).................. तब हर्कोली सर ने कहा की यदि आज मै टेट पर फैसला दे दू और कल यदि नॉन टेट वाले जीत जाये तो टेट मेरिट से उनकी नियुक्ति नहीं नहीं हों पायेगी कीयोंकी टेट धरी न होने के कारन उनकी मेरिट टेट से कैसे जुडेगी ..................... इस कारन इन्होने हमारे केस को नॉन टेट मैटर के साथ लार्जेर बेंच को ट्रांस्फार कर दिया..................... अतएव आज की सुनवाई का मैं खलनायक खरे.
अपना केस भी तीन जजो की व्र्हत बेंच में नान टेट वाले केस के साथ जोड़ दिया है
अब ये केस एक तीन जजों वाली बेंच के हवाले किया गया.जिसमे आदरणीय मुख्य न्यायाधीश श्री शिव कीर्ति सिंह,स्वयं हरकौली महोदय और श्री पी. एस. बघेल शामिल होंगें..जिसमे वो बिना टी ई टी बी. एड. के बारे में डबल बेंच के दिए निर्णय और पूर्व विज्ञापन एवम नए विज्ञापन की स्थिति न्याय के अनुसार, को देखकर अपना निर्णय देंगें .....
अब ये केस एक तीन जजों वाली बेंच के हवाले किया गया.जिसमे आदरणीय मुख्य न्यायाधीश श्री शिव कीर्ति सिंह,स्वयं हरकौली महोदय और श्री पी. एस. बघेल शामिल होंगें..जिसमे वो बिना टी ई टी बी. एड. के बारे में डबल बेंच के दिए निर्णय और पूर्व विज्ञापन एवम नए विज्ञापन की स्थिति न्याय के अनुसार, को देखकर अपना निर्णय देंगें .....
तीन जजों की बेंच अब क्या फिर से टी इ टी की धांधली की जांच करेगी
या ये देखेगी की भर्ती प्रक्रिया बदलने का अधिकार सरकार के पास है या नहीं या ये देखेगी की पुराना विज्ञापन रद्द करना सही था या नहीं .......आखिर इतने दिनों से हर्कोली जी कर क्या रहे थे सिलेक्शन बेस पर उनका कोई कमेंट नहीं आया बस समाचार पत्रों में केवल संजय मोहन और तेत की जांच की ही खबरे आई जो कोर्ट में हो रही थी ..............टी इ टी मेरिट वाले भाई लोग क्या आपने अशोक खोत्ते को बताया था की केस क्या है ? क्योंकि हर्कोली जी कुछ निष्कर्ष निकाल ही नहीं पाए और एक साथी को और बुला बैठे ...................... समय बर्बाद हो रहा है और कुछ नहीं
या ये देखेगी की भर्ती प्रक्रिया बदलने का अधिकार सरकार के पास है या नहीं या ये देखेगी की पुराना विज्ञापन रद्द करना सही था या नहीं .......आखिर इतने दिनों से हर्कोली जी कर क्या रहे थे सिलेक्शन बेस पर उनका कोई कमेंट नहीं आया बस समाचार पत्रों में केवल संजय मोहन और तेत की जांच की ही खबरे आई जो कोर्ट में हो रही थी ..............टी इ टी मेरिट वाले भाई लोग क्या आपने अशोक खोत्ते को बताया था की केस क्या है ? क्योंकि हर्कोली जी कुछ निष्कर्ष निकाल ही नहीं पाए और एक साथी को और बुला बैठे ...................... समय बर्बाद हो रहा है और कुछ नहीं
Monday, March 11, 2013
UPTET : अब वृहद पीठ सुनेगी बीएड अभ्यर्थियों का मामला
गैर टीईटी बीएड को सहायक अध्यापक बनाने पर नए सिरे से होगी सुनवाई
प्रभाकर सिंह केस में खंडपीठ के आदेश से एकल न्यायपीठ असहमत
TET is COMPULSORY OR NOT, 3 JUDGES BENCH WILL HEAR THIS CASE.
Recently contempt (Avmanna Case) is imposed on Senior Officers/ Secretary of UP of not implementing Double Bench Allahabad HC order in this regard.
इलाहाबाद। बिना टीईटी उत्तीर्ण बीएड डिग्री धारकोें को भी सहायक अध्यापक चयन प्रक्रिया में शामिल करने का मामला एक बार फिर खटाई में पड़ गया है। इस मामले पर प्रभाकर सिंह केस में दिए हाईकोर्ट की खंडपीठ के फैसले को वृहद पीठ को संदर्भित कर दिया गया है। अब तीन न्यायाधीश की पीठ नए सिरे से पूरे मामले पर विचार करने के बाद फैसला सुनाएगी।
प्रदेश सरकार द्वारा बिना टीईटी उत्तीर्ण कई बीएड डिग्री धारकोें का अभ्यर्थन रद किए जाने के बाद शिवकुमार शर्मा, यतींद्र कुमार त्रिपाठी आदि ने याचिका दाखिल की थी। इनका कहना था कि खंडपीठ के निर्णय के बावजूद प्रदेश सरकार ने उनका अभ्यर्थन नहीं माना। ऐसी स्थिति में सरकार को निर्देश दिया जाए। मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति एपी साही ने कहा मेरी समझ से टीईटी सभी के लिए अनिवार्य है। ऐसी स्थिति में उन्होंने खंडपीठ के फैसले से असहमति जताते हुए मामले को वृहद पीठ को संदर्भित किया। अब मुख्य न्यायाधीश इस मामले की सुनवाई के लिए तीन जजों की पीठ गठित करेेंगे।
उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट ने 11 नवंबर 2011 को टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने को लेकर दाखिल सैकड़ों याचिकाओं को खारिज करते हुए सहायक अध्यापक भर्ती में टीईटी सभी के लिए अनिवार्य बताया था। इस फैसले के खिलाफ अपील दाखिल की गई। अपील भी खारिज कर दी गई परंतु खंडपीठ ने कहा कि एनसीटीई की अधिसूचना के मुताबिक सहायक अध्यापक भर्ती के लिए अनिवार्य अर्हता के अंतर्गत ही बीएड डिग्री धारकोें को इससे छूट दी गई है। इसलिए बीएड डिग्री धारी अभ्यर्थियों को जो टीईटी उत्तीर्ण नहीं हैं प्रवेश प्रक्रिया में शामिल कर लिया जाए। खंडपीठ ने बीएड डिग्री धारकों को मौका देने का निर्देश दिया था। इस आदेश का पालन नहीं होने पर दाखिल अवमानना याचिका पर बेसिक शिक्षा सचिव को नोटिस भी जारी किया जा चुका है।
Subscribe to:
Comments (Atom)


