Tuesday, February 26, 2013


UPTET : शिक्षक भर्ती प्रक्रिया की हलचल में गुम हो गया टीईटी


UPTET : शिक्षक भर्ती प्रक्रिया की हलचल में गुम हो गया टीईटी

 राज्य मुख्यालय, प्रमुख संवाददाता। पिछले वर्ष अध्यापक पात्रता परीक्षा (टीईटी) नहीं हो पाई। टीईटी 2013 को लेकर भी अभी विभाग में कोई हलचल नहीं है। कारण यह कि टीईटी 2011 के अभ्यर्थियों की सरकारी प्राइमरी स्कूलों में प्रशिक्षु शिक्षक के तौर पर भर्ती प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो पाई है। लिहाजा विभाग चाह रहा है कि ये भर्तियां होने के बाद ही टीईटी की अगली परीक्षा प्रदेश में कराई जाए। सूत्रों के मुताबिक, आला अधिकारी चाहते हैं कि टीईटी 2011 के आधार पर बेसिक शिक्षा परिषद में भर्तियां हो जाएं तो ही अगली टीईटी करवाने की प्रक्रिया शुरू की जाए। हालांकि पिछले वर्ष कई बार विभाग ने प्रस्ताव मंगवाया, इस पर बैठकें भी हुईं लेकिन भर्तियां न हो पाने के चलते इस प्रक्रिया में गति नहीं आ पाई। शिक्षा का अधिकार एक्ट (आरटीई) के तहत टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थी ही कक्षा एक से आठ तक पढ़ा सकेंगे। इसी के चलते 2011 नवम्बर में प्रदेश सरकार ने टीईटी करवाया। टीईटी 2011 में लगभग पौने तीन लाख अभ्यर्थियों ने कक्षा एक से पांच तक की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। लेकिन इसके आधार पर केवल साढ़े तीन हजार भर्तियां ही अभी तक हुई हैं। ये भर्तियां बेसिक शिक्षा परिषद में वशििष्ट बीटीसी, बीटीसी व उर्दू में प्रवीणताधारी उपाधि रखने वाले अभ्यर्थियों की हुई हैं। हालांकि जिन 72,825 पदों को भरने के लिए राज्य सरकार ने आनन-फानन में ये परीक्षा करवाई, वे पद आज तक भर नहीं पाए हैं। मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में है। हालांकि टीईटी उत्तीर्ण अध्यापक का नियम सरकारी, सहायताप्राप्त और यहां तक कि प्राइवेट विद्यालयों पर भी लागू होगा। सरकारी प्राइमरी स्कूलों में भर्तियों का मामला जहां हाईकोर्ट में है वहीं सहायताप्राप्त जूनियर हाईस्कूल के लिए कुछ महीने पहले ही नियमावली में संशोधन किया गया है। सम्बद्ध प्राइमरी व माध्यमिक शिक्षा से संचालित कक्षा आठ तक के लिए भी नियमावली में टीईटी उत्तीर्ण का संशोधन नहीं किया गया है। प्राइवेट स्कूलों में इसे लागू करने के लिए कोई आदेश नहीं जारी हुए। लिहाजा टीईटी 2011 के अभ्यर्थी ही अभी तक रोजगार की राह तक रहे हैं

41,780 और शिक्षकों की होगी भर्ती




41,780 और शिक्षकों की होगी भर्ती

UPTET 2011 - For old advt .  फीस वापसी के आदेश

लखनऊ (ब्यूरो)। बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविंद चौधरी ने मंगलवार को विधानसभा में दावा किया कि सपा सरकार एक साल में लगभग सवा लाख लोगों को नौकरी दे चुकी है। केंद्र ने केवल इसी वर्ष के लिए बीएड डिग्रीधारकों को शिक्षक पद पर नियुक्त करने की छूट दी है। 72,825 शिक्षकों की भर्ती के मामले में सरकार ने हाईकोर्ट के सामने मजबूती के साथ पक्ष रखा है। पूरी उम्मीद है कि हाईकोर्ट का फैसला हमारे पक्ष में होगा। इसके अलावा 41,780 और शिक्षकों की भर्ती शुरू होने जा रही है
प्रश्नकाल में चौधरी ने बताया कि ऐसे बीएड अभ्यर्थियों, जिन्होंने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास कर ली है, उनको प्राथमिक विद्यालयों में प्रशिक्षु शिक्षक के रूप में नियुक्त किए जाने का निर्णय किया गया है। शिक्षक भर्ती के लिए 5 दिसंबर 12 को शासनादेश जारी किया गया था। लेकिन कुछ लोगों की याचिका पर हाईकोर्ट ने स्थगनादेश दे दिया है, जिसके चलते काउंसलिंग की प्रक्रिया स्थगित है। विधायक सुरेश खन्ना ने पूछा कि जब शिक्षकों के तीन-चार लाख पद खाली हैं तो बेरोजगार बीएड डिग्री धारकों का समायोजन क्यों नहीं किया जा रहा है? इस पर चौधरी ने कहा किआरटीई के तहत बिना टीईटी के कोई अध्यापक नहीं बन सकता। केवल इस साल के लिए यह छूट मिली है। सरकार 41,780 शारीरिक, कृषि व कला शिक्षकों की नियुक्ति भी करने जा रही है।

Tuesday, February 12, 2013

UPTET Cut off of All Districts


UPTET Cut off of All Districts

However tomorrow ( on 12th Feb 2012) is hearing in Allahabad Highcourt related to base of selection in Double Bench, And cut off list is meaning full OR not will come in force after decision of Allahabad HC.



UPTET : सरकार की साजिश से नहीं हो रही शिक्षकों की नियुक्ति

: टीईटी उत्तीर्ण संघर्ष मोर्चा की बैठक सोमवार को मेहता पार्क में हुई। इसमें सरकार पर साजिश के तहत शिक्षक नियुक्ति में अवरोध उत्पन्न करने का आरोप लगाया गया। जिलाध्यक्ष रवींद्र यादव ने कहा कि प्रदेश की सरकारें डेढ़ वर्ष से शिक्षक नियुक्ति को उलझाए हुए हैं, जबकि न्यायालय द्वारा हमारी मांग को जायज ठहराया जा चुका है। सरकार ने प्रशिक्षु शब्द को लेकर ढाई लाख लोगों का जीवन दाव पर लगा दिया है। एक सरकार ने टीईटी में प्राप्त अंकों की मेरिट के आधार पर विज्ञापन निकाला तो दूसरी ने रद करते हुए एकेडमिक आधार पर विज्ञापन जारी कर दिया। आखिर इसमें अभ्यर्थियों का क्या दोष है। एक तरफ सरकार टीईटी में धांधली की बात करती है। दूसरी तरफ टीईटी को वैध बताकर नियुक्ति की जाती है। इसमें सरकार की विद्वेष भावना साफ झलक रही है। अरविंद यादव ने कहा कि सरकार यदि हमारी मांग को नहीं मानती है तो हम आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

Saturday, February 9, 2013

आदेश का सटीक हिंदी अनुवाद


आदेश का सटीक हिंदी अनुवाद 
याचिकाओ पर सुनवाई करते हुए 4 फ़रवरी 2013 को दिए गए आदेश में कहा गया:
हमने एक ही तरह की इन याचिकाओं में याचियों के अधिवक्ताओं तथा राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता को सुना। सभी याचिकाएं एक बंच के रूप में 11 फरवरी को सुनवाई के लिए एकसाथ सूचीबद्ध की जाएँ।
सभी अभ्यर्थियों ने अध्यापक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की है . यहाँ इन मामलों में उठने वाले बुनियादी सवालों में से एक यह है कि अगर चयन का आधार TET मेरिट है, तो फिर भले चयन प्रशिक्षण के पहले हो या बाद में, नतीजा एक ही होना है। विज्ञापन (पुराने) का अनुच्छेद 10 कहता है कि NCTE से मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण की सफलतापूर्वक समाप्ति के बाद 1981की नियमावली एवं 12वें संशोधन, 2011के अनुसार मौलिक नियुक्ति दी जाएगी। किसी मामले का निस्तारण करते समय हमेंमौलिकता (वास्तविकता, किसी चीज के वास्तविक प्रभाव) के अनुसार चलना होता है। उदाहरण के लिए, यदि (पुराने विज्ञापन के प्रभावी रहने की दशा में)चयनित अभ्यर्थी "प्रशिक्षु शिक्षक" नकहे जाते, परन्तु योग्यता के अनुसार केवल "वेतन के बराबर छात्रवृत्ति या मानदेय के साथ प्रशिक्षण"
के लिए चुन लिए जाते, और सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा करने के बाद पुनः उनकीटेट-मेरिट (जो उस समय चयन का निर्धारित आधार था) के आधार पर उनको चयन-प्रक्रिया से गुजरना होता, तो भी नतीजा वास्तविकता में एक ही होता। और ऐसी स्थिति में (किसी निर्णय का) यह आधार नहीं रह जाता कि "प्रशिक्षु शिक्षक का कोई पद ही नहीं!"
पुरानी चयन-प्रक्रिया को रद्द करने के आधार, जैसा कि 26.07.2012 के (सरकार के) आदेश में उल्लेख है, दो तरह आधार (अवधारणा/ मान्यता) हैं।
पहला आधार कहता है कि TET के आयोजन में कुछ अनियमितताएं, जैसा कि आरोप लगाया गया है। प्रतीत होता है कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में किसी हाईपावर कमेटी ने एक रिपोर्ट दी, जिसके आधार पर समूची चयन-प्रक्रिया, जिसमे TET में प्राप्तांक ही चयन-निर्धारक थे, को रद्द किया गया।
एकल न्यायाधीश ने अपने प्रश्नगत आदेश में स्पष्ट किया है कि अगर (TET में) कुछ जगहों पर कुछ अनियमितताएं पाई गई थी तो इसके ख़राब हिस्से से TET के अच्छे हिस्से को अलग किये जाने के प्रयास किये जाने चाहिए थे, परन्तु समूची चयन-प्रक्रिया को रद्द नहीं किया जाना चाहिए था।
अबतक राज्य की ओर से ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला है (जिस से पता चल सके) कि अच्छे हिस्सों, मतलब वे जगहें या क्षेत्र, जहां TET में कोई अनियमितता नहीं थी, को खराब हिस्सों, मतलब उन जगहों या क्षेत्रों, जहां अनियमितताएं हुईं थीं, से अलग किया जा सका या नहीं किया जा सका।
अतिरिक्त महाधिवक्ता के निवेदन के अनुसार हाई पावर कमेटी की रिपोर्ट जवाबी-हलफनामे के जरिये कोर्ट में रखी जा सकती है, उस रिपोर्ट या अन्य पूर्ववर्ती दस्तावेजों के आधार पर (इस बात का भी ) एक तर्क-संगत कारण भी इंगित होगा कि (कैसे) अच्छे हिस्से को खराब हिस्से से अलग किया जाना संभव थाया नहीं था।
26.07.2012 के आदेश का दूसरे प्रकारका आधार यह इंगित करता है कि (सरकार केस्तर पर) ऐसा अनुभव किया गया था कि चयनहेतु योग्यता निर्धारण के लिए TET में प्राप्त अंकों के आधार पर बने पैमाने को हटाकर TET-मेरिट को नजर-अंदाज़ करके, चयन हेतु योग्यता-निर्धार ण के लिए पुराने शैक्षणिक प्रदर्शन पर आधारित गुणांक के आधार परपैमाना बनाया जाना चाहिए। बाद में मन में उपजे किन्ही ख्यालात के कारण ऐसा माना गया कि यह नया पैमाना बेहतर होगा। उसी के मुताबिक नियमावली में परिवर्तन किये गए।
माननीय एकल न्यायाधीश ने अपने प्रश्नगत निर्णय में स्पष्ट किया है कि चयन के मानकों में होने वाले ऐसे कोई भी बदलाव अग्रगामी प्रभाव वाले होंगे (बदलाव के बाद शुरू होने वाली किसी प्रक्रिया पर) और पूर्ववर्ती चयन को प्रभावित नहीं कर सकते।
इसके भी आगे बढ़कर, हमारा प्रथम-दृष्टया विचार है कि (सरकार के) विचारों में (आया) बदलाव, "कि योग्यता के निर्धारण के लिए पुराने पैमाने को हटाकर बेहतर प्रतीत होने वाले पैमाने को लागू किया जाये", किसी समूची चयन-प्रक्रिया को रद्द करने का कारण नहीं हो सकता। यदि राज्य की ओर से पेश किये गए इस प्रकार के आधार या कारण स्वीकार किये जाते हैं तो कल को इस बात की भी सम्भावना बन जाएगी कि कोई और सरकार या अन्य अधिकारी सोच ले कि (अब) शायद यह नया लागू किया गया पैमाना(गुणांक) हटाकर वह पैमाना लागू किया जा सकता है जिसे वह इस पैमाने (गुणांक)से भी बेहतर मानता है, तो वह फिर से एक चल रही चयन-प्रक्रिया को कचरापेटी में डालने का आधार तैयार कर सकता है।
नयी चयन-प्रक्रिया में, बहुत ही बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल हुए हैं जिनकी काउंसिलिंग आज से शुरू हुई है।
स्वाभाविक है कि काउंसिलिंग (की प्रक्रिया) समय लेगी, और सभी पक्षों की सहमति के साथ हमारा इरादा इन सभी याचिकाओं को स्वीकार करने के चरण में ही अंतिम रूप से निस्तारित करने का हैजिसके लिए हमने 11.02.2013 की तिथि निर्धारित की है। अतएव, हमारा मत है किइतने सारे अभ्यर्थियों को काउंसिलिंगकी परेशानी में नहीं डालना चाहिए, जो (काउंसिलिंग) कि इन सभी याचिकाओं के अन्ततः स्वीकार होने (याचियों की मांग मान लिए जाने) की स्थिति में निरर्थक कार्यवाही भर रह जाएगी। इसलिए, इस मामले से जुड़े सभी पक्षों केबृहत् और समग्र हितों सहित उन अभ्यर्थियों के हितों को, जो हमारे सामने एक पक्ष के रूप में नहीं हैं, कोध्यान में रखते हुए हमारा यह मत है कि (07.12.2012 के विज्ञापन के अनुसार) चल रही चयन प्रक्रिया को 11.02.2013तक स्थगित रहना चाहिए। (इसी के) अनुसरण में आदेश (किया जाता है)

UPTET : आखिर कब मिलेगी नौकरी



UPTET : आखिर कब मिलेगी नौकरी
 


आखिर कब मिलेगी नौकरी
हाईकोर्ट के प्रमुख आदेश
फैक्ट फाइल
नवंबर 2011 में शुरू हुई प्रक्रिया में लगातार आ रही हैं मुश्किलें
ये हैं मानक
प्रदेश में प्राइमरी स्कूलों में शिक्षक भर्ती की योग्यता स्नातक और दो वर्षीय बीटीसी है। विशेष परिस्थितियों में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) से अनुमति लेकर बीएड वालों को छह माह की विशिष्ट बीटीसी की ट्रेनिंग देकर सहायक अध्यापक बनाया जा सकता है। उत्तर प्रदेश की सरकारों ने वोट बैंक की राजनीति के लिए बीएड वालों को विशिष्ट बीटीसी की ट्रेनिंग देकर शिक्षक बनाने का खेल शुरू किया। यह सिलसिला अनवरत जारी है।


यहां हुई चूक
शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के लिए ऑनलाइन आवेदन लिए गए। आवेदन को जांचे-परखे बिना ही मेरिट जारी कर दी गई। नतीजा वरिष्ठता क्रम में सबसे ऊपर ऐसे नाम आ गए जिनके पूर्णांक और प्राप्तांक एक समान थे। इसका सबसे बड़ा असर मेरिट पर पड़ा। न्यूनतम मेरिट 68.23 गई। इसके चलते 60 फीसदी से अधिक अंक में पास होने वालों का नाम तक नहीं आया।
यह है पेंच
प्रदेश में शिक्षकों की भर्ती में सबसे बड़ा पेंच बार-बार बदला जाने वाला नियम है। वर्ष 2011 में शिक्षक भर्ती के लिए मानक टीईटी मेरिट को रखा गया। सत्ता बदलने के बाद सरकार ने टीईटी मेरिट को समाप्त कर उसे केवल पात्रता परीक्षा माना और भर्ती शैक्षिक मेरिट पर करने का निर्णय किया। टीईटी पास 2.71 लाख बीएड डिग्रीधारकों में कुछ का मानना है कि भर्ती टीईटी मेरिट पर ही होनी चाहिए, तो कुछ इसके पक्ष में नहीं हैं।
मेरिट वाले आरक्षित वर्ग से अभ्यर्थियों को सामान्य वर्ग में मौका
शिक्षकों की भर्ती में सामान्य वर्ग के खाते में आरक्षण के हिसाब से भले ही 36 हजार 412 सीटें रखी गई हों, पर इससे भी कम सीटें आएंगी। कुल 72 हजार 825 सीटों में अनुसूचित जाति के हिस्से में 21 प्रतिशत 15 हजार 299, अनुसूचित जनजाति के हिस्से में दो प्रतिशत 1455 तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के हिस्से में 27 प्रतिशत 19 हजार 660 सीटें आएंगी। टॉप मेरिट वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को सामान्य वर्ग की सीटों पर भी मौका मिलता है।
इसलिए हो रहे मुकदमे
शिक्षक भर्ती के लिए बार-बार मानक बदले जाने को लेकर ही मुकदमे हो रहे हैं। टीईटी पास कुछ बीएड डिग्रीधारकों का मानना है कि पूर्व में तय मानक के आधार पर ही भर्ती की जानी चाहिए। सरकार बार-बार मानक क्यों बदल रही है। कुछ ने सरकार द्वारा निर्धारित फीस पर भी आपत्ति उठाई। कहा कि एक ही पद के लिए हर जिले के लिए अलग-अलग शुल्क क्यों

Monday, February 4, 2013

buri khabar mitro


Sunday, February 3, 2013

प्रशिक्षु शिक्षकों के भर्ती की तैयारियां पूरी 2012 में बीएड उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को बाहर रखा गया


प्रशिक्षु शिक्षकों के भर्ती की तैयारियां पूरी
चार फरवरी से आवेदकों की शुरू होगी काउंसलिंग,
अभ्यर्थियों के लिए बनाए गए छह केंद्र
 अमर उजाला नेटवर्क
संतकबीरनगर। टीईटी उत्तीर्ण प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया के काउंसलिंग की तैयारी जिला बेसिक शिक्षा विभाग ने तकरीबन पूरी कर ली है। डायट परिसर में काउंसलिंग सेंटर बनाए गए हैं। काउंसलिंग की प्रक्रिया चार फरवरी (सोमवार) से शुरू होगी। इसके लिए छह काउंसलिंग सेंटर बनाए गए हैं। महिलाओं के लिए अलग से पटल बनाया गया है। इसमें निर्धारित 800 सीटों के लिए एक लाख 11 हजार आवेदकों के शामिल होने की संभावनाएं हैं। यह दीगर है कि इस चयन प्रक्रिया सेे 2012 में बीएड उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को बाहर रखा गया है।
जनपद में प्रशिक्षु शिक्षक के लिए 800 पद सृजित हैं। इसमें 400 पद सामान्य जाति के लिए निर्धारित है। जबकि शेष 400 पद में से 216 पिछड़ी जाति के लिए, 168 एससी, 16 एसटी के आवेदकों को बुलाया गया है। साथ ही आरक्षित सीटों के लिए तीन गुणा आवेदकों को बुलाया गया है। इन पदों पर नियुक्ति पाने के लिए कुल 1,12057 अभ्यर्थियों ने जिले में आवेदन किया था। इनमें से इस चयन प्रक्रिया सेे 2012 में बीएड उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को बाहर कर दिया गया है। लिहाजा, काउंसलिंग में अब कुल 1,11057 अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावनाएं हैं। काउंसलिंग में पहले चरण में सामान्य कोटे के लिए पहले और दूसरे दिन 200-200 अभ्यर्थियों को बुलाया गया है।
इसी प्रकार से पिछड़ी जाति व अन्य जाति के लिए आवेदकों को बारी-बारी बुलाया जाएगा। इसके लिए डायट परिसर में छह काउंसलिंग सेंटर बनाए गए हैं। जहां पर एक-एक खंड शिक्षा अधिकारियों के नेतृत्व में चार सदस्यों की तैनाती की गई है। जिससे काउंसलिंग में कोई समस्या न उत्पन्न हो।
इस दौरान आवेदकों को अपने सभी मूल प्रमाण पत्रों तथा अन्य अभिलेखों एवं उनकी दो प्रतियों में फोटोकॉपी के साथ उपस्थित होना है। काउंसलिंग में बीएसए ने महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग से पटल बनाया है। जिससे किसी को समस्याओं का सामना न करना पड़े और भर्ती की प्रक्रिया को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया जा सके। लंबे अरसे के बाद बीएसए विभाग में इतनी बड़ी भर्ती हो रही है। जिसको लेकर विभाग काफी सशंकित है।
गठित टीम करेगी सत्यापन
अभ्यर्थियों की भीड़ को देखते हुए छह काउंसलिंग केंद्र बनाए गए हैं। हर काउंसलिंग केंद्र पर खंड शिक्षा अधिकारियों की अगुवाई में चार-चार सदस्यीय टीम बनाई गई है। इसमें खंड अधिकारी नरेंद्र सिंह, आरडी प्रसाद, विंध्येश्वरी प्रसाद, उदय शंकर चौधरी, राम दुलारे, चंद्र भूषण त्रिपाठी, श्याम सुंदर पटेल शामिल हैं।
कड़ी सुरक्षा के बीच होगी काउंसलिंग
अभ्यर्थियों की काउंसलिंग में कोई विवाद की स्थिति न उत्पन्न होे, इसके लिए पुलिस बल की तैनाती की गई है।
प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया सोमवार से शुरू होगी। इसके लिए सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पहले दिन सामान्य वर्ग के लिए 200 लोगों को बुलाया गया है। कहीं किसी को कोई दिक्कत न होने पाए, इसके लिए भी विशेष तैयारियां की गई हैं। किसी भी अभ्यर्थि को कोई परेशानी नहीं होगी।
-राम सिंह, बीएसए
महिलाओं के लिए किया गया है विशेष इंतजाम
भर्ती प्रक्रिया में शामिल होंगे 1,11057 अभ्यर्थी

Saturday, February 2, 2013

2012 ke sandarbh me
साथियो आज के आवाहन से थिर्त राज प्रयाग की नगरी इलाहबाद मे संखनाद की आवाज से माध्यमिक शिक्षा परिसद के सिनियर सचिव ने स्वयं आकर हम लोगो से वार्ता की सचिव स्तर इस वार्ता मे ,सचिव ने कहा की टेट की परीक्षा
का अनुभाग देखने वाले सचिव सरकारी कार्य के कारन बहार है और आज वह मौजूद नही है उन्होने बतया की उपरोक्त के विषय मे माननीय उच्च न्यायलय लखनऊ द्वारा भी जवाब श्री निशांत मिश्र की याचिका पर भी देना है
जिसके लिए सोमवार को मीटिंग रखी गई है,सोमवार को आपको इसके संदर्भ मे एक कॉपी आदेश की मिल जाएगी,
दोस्तों आपके संखनाद की आवाज से सासन और प्रशासन दोनों हिल गए है ,आप से अनुरोध ही की दिनाक ४ फ़रवरी को सुबह ९ बजे आजाद पार्क पहुचना है वह से हम लोग माध्यमिक शिक्षा परिसद के ऑफिस चलेगे, दोस्तों अगर इस संखनाद की आवाज कम न होने पाए, दोस्तों ४ फ़रवरी को आखरी संखनाद की आवाज़ इतनी तेज होनी चाहिए जिसकी ध्वनि लखनऊ तक सुनाई पडे,और लोगो को ये लगे की ये अपने हक की लड़ाई मे विजय प्राप्त करने जा रहे ही, इसी बात पर एक स्वामी विवेकानंद जी की पक्ति याद आई ,जितना बड़ा संग्राम होगा विजय जश्न भी उससे बड़ा होगा ,दोस्तों याद रखना ही की आपकी उपस्थिथी बहुत ही जरुरी ही,अब घर से निकलो,
अब या तो आर करना है या तो पार होना है या तो पार होना है

किसी बी सहयता/जानकारी के लिए अपने मित्र श्री आशुतोष चतुर्वेदी जी से उनके नंबर पर ८९५७६८६६१६,9450150163
 पर संपर्क कर सकते है,

2012 ke sandarbh me 9450150163

2012 ke sandarbh me
साथियो आज के आवाहन से थिर्त राज प्रयाग की नगरी इलाहबाद मे संखनाद की आवाज से माध्यमिक शिक्षा परिसद के सिनियर सचिव ने स्वयं आकर हम लोगो से वार्ता की सचिव स्तर इस वार्ता मे ,सचिव ने कहा की टेट की परीक्षा
का अनुभाग देखने वाले सचिव सरकारी कार्य के कारन बहार है और आज वह मौजूद नही है उन्होने बतया की उपरोक्त के विषय मे माननीय उच्च न्यायलय लखनऊ द्वारा भी जवाब श्री निशांत मिश्र की याचिका पर भी देना है
जिसके लिए सोमवार को मीटिंग रखी गई है,सोमवार को आपको इसके संदर्भ मे एक कॉपी आदेश की मिल जाएगी,
दोस्तों आपके संखनाद की आवाज से सासन और प्रशासन दोनों हिल गए है ,आप से अनुरोध ही की दिनाक ४ फ़रवरी को सुबह ९ बजे आजाद पार्क पहुचना है वह से हम लोग माध्यमिक शिक्षा परिसद के ऑफिस चलेगे, दोस्तों अगर इस संखनाद की आवाज कम न होने पाए, दोस्तों ४ फ़रवरी को आखरी संखनाद की आवाज़ इतनी तेज होनी चाहिए जिसकी ध्वनि लखनऊ तक सुनाई पडे,और लोगो को ये लगे की ये अपने हक की लड़ाई मे विजय प्राप्त करने जा रहे ही, इसी बात पर एक स्वामी विवेकानंद जी की पक्ति याद आई ,जितना बड़ा संग्राम होगा विजय जश्न भी उससे बड़ा होगा ,दोस्तों याद रखना ही की आपकी उपस्थिथी बहुत ही जरुरी ही,अब घर से निकलो,
अब या तो आर करना है या तो पार होना है या तो पार होना है

किसी बी सहयता/जानकारी के लिए अपने मित्र श्री आशुतोष चतुर्वेदी जी से उनके नंबर पर ८९५७६८६६१६,9450150163 पर संपर्क कर सकते है,
20 हजार आवेदन फर्जी किसी के अंक पूर्णांक से अधिक तो किसी को एक या दो • अमर उजाला ब्यूरो रायबरेली।
 बेसिक शिक्षकों की होने वाली बंपर भर्ती में मेरिट में नाम दर्ज कराने के लिए अभ्यर्थियों ने इंटरनेट से आवेदन करने में खूब गड़बड़ी की। जिले में 20 हजार से अधिक ऐसे आवेदन हैं, जो प्रथमदृष्टया फर्जी प्रतीत हो रहे हैं। किसी के प्राप्तांक पूर्णांक से अधिक हैं तो किसी को एक या दो अंक ही मिले हैं। ऐसे में अधिक प्राप्तांक पाने वाले अभ्यर्थियों के नाम तैयार की गई कट ऑफ मेरिट में शामिल हो गया है। इस घालमेल की अंदर ही अंदर पोल खुलने के बाद यहां बेसिक शिक्षा विभाग में अफरातफरी का माहौल है। विभाग से सूची तो चस्पा कर दी गई है, लेकिन ऐसे अभ्यर्थियों के नाम काउंसलिंग के दौरान सूची से बाहर करने की रणनीति भी बना ली गई है। जिले में शिक्षकों के 900 पदों की भर्ती के लिए इंटरनेट के माध्यम से 1,34,323 लोगों ने आवेदन पत्र जमा किए हैं। शासन के आदेश पर विभाग ने कट ऑफ मेरिट जारी की तो तरह-तरह के नमूने सामने आ गए। फर्जी तरीके से आवेदन करके अभ्यर्थियों ने आवेदन पत्र जमा करने में जमकर गड़बड़ी की है। जिले में 20 हजार से अधिक ऐसे आवेदन जमा किए गए हैं। सूची में अखिलेश यादव पुत्र मुलायम यादव देख अफसर भी चकित बाराबंकी। परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर जारी कट ऑफ मेरिट सवालों के घेरे में आ गई है। सूची में अखिलेश यादव तक के नाम शामिल हुए हैं। यही नहीं अंग्रेजी में कई ऐसे नामों को शामिल दिखाया गया है जिनका कोई मतलब ही नहीं है। फर्जी नामों से किए गए आवेदन से मेरिट काफी ऊपर पहुंच गई है और कई पात्र सूची में स्थान पाने से वंचित रह गए हैं। बताते चलें की करीब छह माह पूर्व प्राथमिक स्कूल में दो सौ शिक्षकों के लिए आवेदन मांगे गए थे। कई आवेदनकर्ताओं ने फर्जी नाम से भी आवेदन कर दिया। हाल में जारी कट ऑफ सूची में अखिलेश यादव पुत्र मुलायम यादव के नाम शामिल हैं।

प्रशिक्षु शिक्षक के 58 हजार आवेदन निरस्त

प्रशिक्षु शिक्षक के 58 हजार आवेदन निरस्त पूर्णाक से अधिक प्राप्तांक व आयु के फैक्टर में खरे नहीं उतरे अभ्यर्थी 
 प्राथमिक स्कूलों में प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती के लिए किए गए आनलाइन आवेदनों में गलतियों तथा अन्य वजहों से तकरीबन 58 हजार फार्म निरस्त कर दिए गए हैं। इसमें बहुत से अभ्यर्थियों ने पूर्णाक से अधिक प्राप्तांक भर दिए हैं तो कईयों की आयु अधिक है। वहीं परीक्षा में निर्धारित प्रतिशत से कम अंक लेने वाले भी इस दौड़ में शामिल होने से वंचित हो गए हैं। प्राथमिक स्कूलों में 72825 शिक्षकों के रिक्त पदों पर प्रशिक्षु शिक्षकों की नियुक्ति के लिए शासन ने अभ्यर्थियों से आवेदन मांगे थे जिसके लिए अभ्यर्थियों ने आनलाइन आवेदन फार्म भरा था। जिसमें ढेरों गलतियों की वजह से हजारों अभ्यर्थियों के आवेदन बेसिक शिक्षा परिषद इलाहाबाद ने निरस्त कर दिए हैं। निरस्त होने वाले अभ्यर्थियों के फार्मो में अधिकांश के फार्म इसलिए निरस्त हुए हैं कि उनकी न्यूनतम/अधिकतम आयु संबंधी अर्हता पूरी नहीं है। तो बहुत से ऐसे अभ्यर्थी भी हैं जिन्होंने ई-आवेदन में पूर्णाक से अधिक प्राप्तांक भर दिया है। इसके अलावा ऐसे आवेदन पत्र भी निरस्त किए गए हैं जिन्होंने परीक्षा में निर्धारित प्रतिशत से कम अंक प्राप्त किया है। जनपद में 58297 फार्म बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा निरस्त कर दिए गए हैं। इसमें सामान्य जाति के अभ्यर्थियों के निरस्त फार्मो की संख्या 7042 है। अनुसूचित जाति के निरस्त फार्म 6544 हैं। अनुसूचित जनजाति के निरस्त फार्मो की संख्या 6570 है। पिछड़ा जाति के निरस्त फार्म 6886 हैं। दृष्टिबाधित विकलांग के निरस्त फार्मो की संख्या 6679, श्रवणबाधित विकलांगों के निरस्त फार्मो की संख्या 6518 है तथा अन्य विकलांगों के निरस्त फार्मो की संख्या 6925 है। इसके अलावा पालिटिकल सफरर अभ्यर्थियों के निरस्त हुए फार्म 6290 हैं तथा भूतपूर्व सैनिक कोटे में 4843 अभ्यर्थियों के फार्म निरस्त कर दिए गए हैं। इस संबंध में सचिव बेसिक शिक्षा परिषद इलाहाबाद ने कहा है कि निरस्त हुए फार्म के बाबत जानकारी जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से अभ्यर्थियों को दी जाएगी। उन्हें आवश्यक निर्देश दे दिए गए हैं। वैसे शिक्षा विभाग द्वारा अभ्यर्थियों के निरस्त फार्मो के बाबत जानकारी के लिए सूची भी विभाग पर चस्पा कर दी गई है। आज दिनभर अभ्यर्थी सूची में अपना नाम खंगालते रहे तथा मंथन में भी लगे रहे कि उनके फार्म क्यों निरस्त हो गए। अभ्यर्थियों के चेहरों पर मायूसी चस्पा थी तो मौका गंवाने का मलाल भी दिख रहा रहा था। .

शुरू होने से पहले ही टीईटी भर्ती विवादों में बैक डोर से भर्ती की आशंका,

शुरू होने से पहले ही टीईटी भर्ती विवादों में बैक डोर से भर्ती की आशंका, 

कहां गई 1554 सीटें • सिटी रिपोर्टर लखीमपुर खीरी। जिले में टीईटी उत्तीर्ण बेरोजगारों को प्रशिक्षु अध्यापक बनाने की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही विवादों में फंस गई है। 6200 प्रशिक्षु अध्यापकों की भर्ती के बजाय शासन के निर्देशों को अनसुना करते हुए महज 4646 पदों की काउंसिलिंग के लिए विज्ञप्ति दी गई है, उसमें भी तमाम त्रुटियाें ने जिला स्तरीय भर्ती कमेटी की विश्वनीयता पर सवाल खडे़ कर दिए हैं। प्राथमिक शिक्षा की तस्वीर बदलने के लिए शासन ने जिला स्तर पर टीईटी उत्तीर्ण उम्मीदवारों को प्रशिक्षु अध्यापक पद पर भर्ती के लिए विज्ञप्ति निकाली हैं, इसमे जिला खीरी में 6200 पदों के लिए शासन स्तर पर भर्ती कराने की कवायद की जा रही है। वहीं काउंसिलिंग के लिए बीएसए की ओर से जारी विज्ञप्ति की बात करें तो महज 4646 पदों के लिए आवेदकों को बुलाया गया है, ऐसे में भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए यह कई आवेदकों ने आरोप लगाया है कि शेष 1554 पदों को बैकडोर से भर्ती कराने के लिए ही सारा खेल किया जा रहा है। इस बावत अमर उजाला ने एनआईसी खीरी व बेसिक शिक्षा विभाग की वेबसाइट और सबंधित विषय पर पड़ताल की तो पता चला कि सीटें छुपाने की बात महज आरोप नहीं हैं। भूतपूर्व सैनिकों का कोटा भी प्रभावितः शासन की नीति के मुताबिक रिक्त सीटों के पांच फीसदी सीटें भूतपूर्व सैनिकों के लिए आरक्षित की जाएगी, इस तरह 6200 सीटों के सापेक्ष 310 सीटे भूतपूर्व सैनिकों के खाते में आनी चाहिए लेकिन विभाग की ओर से महज 182 आवेदकों को ही काउंसिलिंग के लिए बुलाया गया है। इस तरह भूतपूर्व सैनिकों के कोटे में 128 सीटों का सीधा नुकसान भूतपूर्व सैनिकों को होगा। क्षैतिज आरक्षण ने बिगाड़ा गणित शासन की नीति के मुताबिक जिले में रिक्त 6200 सीटों के सापेक्ष आरक्षण के मुताबिक बटवारें के अनुसार सामान्य वर्ग के लिए 3100 सीटे, पिछड़ा वर्ग के लिए 1674 सीटे और अनुसूचित जाति के लिए 1302 सीटों तथा अनुसूचित जनजाति के लिए 124 सीटे आरक्षित की गई थी, लेकिन क्षैतिज आरक्षण की बात करें तो बटवारें की इन सीटों में विकलांगों को तीन प्रतिशत, भूतपूर्व सैनिकों को पांच फीसदी, और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के लिए दो प्रतिशत अलग से आरक्षण दिया जाएगा। यह आरक्षण क्षैतिज आरक्षण कहलाएगा जो दस फीसदी होगा। बस इसी जोड़ घटाने में जिला स्तर पर चूक हो गई विभाग की ओर से सबंधित बटवारें की सीटों में से 10 फीसदी सीटें क्षैतिज आरक्षण के लिए छोड़ना चाहिए था लेकिन उसने कुल 6200 सीटों के 10 फीसदी सीटे अर्थात 620-620 सीटें प्रत्येक आरक्षण कोटे से कम कर दी। नियम पूर्वक है काउंसिलिंग के लिए बुलावा वहीं जिला स्तरीय भर्ती समिति के सचिव व बीएसए डा. अचल मिश्र ने बताया काउंसिलिंग के लिए बुलावा पत्र नियम पूर्वक भेजे गए हैं।

UPTET - टीईटी अभ्यर्थी और भर्ती


UPTET - टीईटी अभ्यर्थी और भर्ती

UPTET - टीईटी अभ्यर्थी और भर्ती


फर्जी आवेदनों के कारण प्रथम काउंसलिंग वाले अभ्यरथियो को कई समस्यों से जूझना पड़ रहा है 
कई अभ्यर्थीयो को ग्रह जनपद छोड़कर बाहर के जिलों में नंबर आने पर , अपनी सीट सुरक्षित करने के लिए ग्रह जनपद छोड़ कर अन्य जिलों का भी चुनाव करना पड़ सकता है
अगर सभी तरह के फर्जी आवेदनों को बाहर रखा जाए और उसके बाद काउंसलिंग की कट-ऑफ़ जारी की जाती तो इससे प्रथम काउंसलिंग में ऊँचा स्थान रखने वालों को राहत मिल सकती थी ।

टी ई टी अभ्यर्थीयों में भी कई मत हैं -
1. एक धड़ा बी . एड 2012 वालों को नियुक्ति से बाहर देखने के मत में है , क्योंकि उनके अनुसार- वे नियुक्ति के पात्र नहीं है
वे टी ई टी परीक्षा के भी पात्र नहीं थे । टी ई टी एपीरिंग के बारे में उनके अपने मत हैं
2. जबकि बी . एड 2011 वालों का कहना है कि उन्होंने आवेदन सरकार द्वारा जारी किये गए विज्ञापन के अनुरूप किया है
और पिछला विज्ञापन रद्द किया जा चुका है
3. कई लोगो का मानना है कि भर्ती टी ई टी मेरिट से होनी चाहिए और इसके लिये वह सुप्रीम कोर्ट जा रहे हैं ।
आखिर उनका क्या दोष , उन्होंने तो परीक्षा मेहनत से पास की थी ।

4. कई लोगो का मानना है कि भर्ती सरकार का कार्य है और हाई कोर्ट इस पर मुहर लगा चुका है 
ये भर्ती प्रक्रिया काफी लम्बे समय से चल रही है और काफी तरह के उतार चडाव सामने आते रहे , यू पी टी ई टी परीक्षा
के बाद जारी विज्ञापन में बदलाव और आये दिन कोर्ट में नए नए मामले आते रहना , अभ्यर्थीयों के मन में शंकाएं उत्पन्न करता रहता है