Saturday, February 2, 2013

प्रशिक्षु शिक्षक के 58 हजार आवेदन निरस्त

प्रशिक्षु शिक्षक के 58 हजार आवेदन निरस्त पूर्णाक से अधिक प्राप्तांक व आयु के फैक्टर में खरे नहीं उतरे अभ्यर्थी 
 प्राथमिक स्कूलों में प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती के लिए किए गए आनलाइन आवेदनों में गलतियों तथा अन्य वजहों से तकरीबन 58 हजार फार्म निरस्त कर दिए गए हैं। इसमें बहुत से अभ्यर्थियों ने पूर्णाक से अधिक प्राप्तांक भर दिए हैं तो कईयों की आयु अधिक है। वहीं परीक्षा में निर्धारित प्रतिशत से कम अंक लेने वाले भी इस दौड़ में शामिल होने से वंचित हो गए हैं। प्राथमिक स्कूलों में 72825 शिक्षकों के रिक्त पदों पर प्रशिक्षु शिक्षकों की नियुक्ति के लिए शासन ने अभ्यर्थियों से आवेदन मांगे थे जिसके लिए अभ्यर्थियों ने आनलाइन आवेदन फार्म भरा था। जिसमें ढेरों गलतियों की वजह से हजारों अभ्यर्थियों के आवेदन बेसिक शिक्षा परिषद इलाहाबाद ने निरस्त कर दिए हैं। निरस्त होने वाले अभ्यर्थियों के फार्मो में अधिकांश के फार्म इसलिए निरस्त हुए हैं कि उनकी न्यूनतम/अधिकतम आयु संबंधी अर्हता पूरी नहीं है। तो बहुत से ऐसे अभ्यर्थी भी हैं जिन्होंने ई-आवेदन में पूर्णाक से अधिक प्राप्तांक भर दिया है। इसके अलावा ऐसे आवेदन पत्र भी निरस्त किए गए हैं जिन्होंने परीक्षा में निर्धारित प्रतिशत से कम अंक प्राप्त किया है। जनपद में 58297 फार्म बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा निरस्त कर दिए गए हैं। इसमें सामान्य जाति के अभ्यर्थियों के निरस्त फार्मो की संख्या 7042 है। अनुसूचित जाति के निरस्त फार्म 6544 हैं। अनुसूचित जनजाति के निरस्त फार्मो की संख्या 6570 है। पिछड़ा जाति के निरस्त फार्म 6886 हैं। दृष्टिबाधित विकलांग के निरस्त फार्मो की संख्या 6679, श्रवणबाधित विकलांगों के निरस्त फार्मो की संख्या 6518 है तथा अन्य विकलांगों के निरस्त फार्मो की संख्या 6925 है। इसके अलावा पालिटिकल सफरर अभ्यर्थियों के निरस्त हुए फार्म 6290 हैं तथा भूतपूर्व सैनिक कोटे में 4843 अभ्यर्थियों के फार्म निरस्त कर दिए गए हैं। इस संबंध में सचिव बेसिक शिक्षा परिषद इलाहाबाद ने कहा है कि निरस्त हुए फार्म के बाबत जानकारी जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से अभ्यर्थियों को दी जाएगी। उन्हें आवश्यक निर्देश दे दिए गए हैं। वैसे शिक्षा विभाग द्वारा अभ्यर्थियों के निरस्त फार्मो के बाबत जानकारी के लिए सूची भी विभाग पर चस्पा कर दी गई है। आज दिनभर अभ्यर्थी सूची में अपना नाम खंगालते रहे तथा मंथन में भी लगे रहे कि उनके फार्म क्यों निरस्त हो गए। अभ्यर्थियों के चेहरों पर मायूसी चस्पा थी तो मौका गंवाने का मलाल भी दिख रहा रहा था। .

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