Sunday, April 21, 2013

अति शीघ्र होगी शिक्षक और अनुदेशकों की भर्ती


अति शीघ्र होगी शिक्षक और अनुदेशकों की भर्ती
 माध्यमिक व प्राथमिक शिक्षा निदेशक बासुदेव यादव ने कहा कि 72825 शिक्षकों तथा 42 हजार अनुदेशक शिक्षकों की नियुक्ति अति शीघ्र की जाएगी। माध्यमिक शिक्षा में टीजीटी और पीजीटी आयोग का गठन हो चुका है। पूर्व में आवेदन कर चुके अभ्यर्थियों की जून में परीक्षा कराकर साक्षात्कार के बाद उनकी नियुक्ति कर दी जाएगी।
वह रविवार को ग्राम विकास इण्टर कॉलेज में पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि टीईटी को लेकर नियुक्ति का मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन चल रहा है। जिसके चलते 72 हजार से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो पा रही है। जुलाई से पूर्व ही फैसला आने की उम्मीद है। उसके बाद अनुदेशक शिक्षकों सहित एक लाख से अधिक पदों पर भर्ती की जाएगी। उन्होंने माध्यमिक शिक्षकों की कमी शीघ्र पूरा करने का दावा किया।
निदेशक ने सर्व शिक्षा अभियान के तहत सभी अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों और शिक्षकों से बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन कराए जाने की अपील किया। उन्होंने कहा कि सभी अभिभावकों की अर्थ व्यवस्था ऐसी नहीं है कि वे प्राइवेट विद्यालयों में महंगी शिक्षा अपने बच्चों को दे सकें। सरकारी स्कूलों में नि:शुल्क पुस्तक, ड्रेस, भोजन दिया जा रहा है

आज जारी होगी अनुदेशक भर्ती मेरिट !


आज जारी होगी अनुदेशक भर्ती मेरिट !
 इलाहाबाद : राज्य परियोजना की पूर्व घोषणा के अनुसार अनुदेशक भर्ती की मेरिट लिस्ट आज जारी हो सकती है। परियोजना अधिकारियों की पूर्व घोषणा के अनुसार अनुदेशक भर्ती का कट ऑफ व मेरिट लिस्ट 22 व 23 को जारी हो सकती है।
गौरतलब है कि प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में संविदा पर अनुदेशक भर्ती किए जा रहे हैं। इसके लिए महीने भर पहले आवेदन हो चुके हैं। अभ्यर्थियों को कट ऑफ और मेरिट सूची का इंतजार है। भर्ती शुरू होने के समय घोषित समय सारणी के अनुसार कट ऑफ व मेरिट लिस्ट आठ अप्रैल को घोषित कर 30 अप्रैल से काउंसिलिंग शुरू कराने का लक्ष्य रखा गया था। भर्ती के लिए प्रदेश भर में जिलेवार लगभग पांच लाख आवेदक हैं।
उत्तर प्रदेश में संविदा पर अनुदेशकों की भर्ती के लिए 41307 पद घोषित किए गए हैं। प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा सुनील कुमार की ओर से 31 जनवरी 2013 को इस संबंध में एक आदेश जारी किया गया था। इसके अनुसार सौ छात्र संख्या वाले उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कला शिक्षा, शारीरिक एवं स्वास्थ्य शिक्षा और कार्यानुभव शिक्षा के अंशकालिक अनुदेशक भर्ती किए जाने हैं। भर्ती के लिए 25 फरवरी से प्रदेश भर के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने विज्ञापन प्रकाशित करवाए थे। विज्ञापन के अनुसार 21 मार्च तक आवेदन शुल्क व 23 मार्च तक ऑनलाइन आवेदन हुए हैं। आठ अप्रैल को राष्ट्रीय सूचना केंद्र एनआईसी को आवेदन पत्रों के आधार पर विषय और आरक्षणवार मेरिट सूची जारी करना था।
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यूपीटेट (UP-TET) 2013 आयोजित कराये जाने के सम्‍बन्‍ध में जारी शासनादेश


श्री सुनील कुमार, प्रमुख सचिव, उ0प्र0 शासन के आदेश शिक्षा अनुभाग-11 लखनउ दि0 17 अप्रैल 2013 के द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा वर्ष 2013 आयोजित कराये जाने के सम्‍बन्‍ध में शासनादेश पारित कर दिया गया है। नि:शुल्‍क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 में प्राविधानित व्‍यवस्‍थाओं के क्रम में शिक्षक पात्रता परीक्षा (UP-TET) कराये जाने की अनिवार्यतानुसार राष्‍ट्रीय अध्‍यापक शिक्षा परिषद द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार शिक्षक पात्रता परीक्षा कराई जानी है, उक्‍त परीक्षा का संचालन परीक्षा नियामक प्राधिकारी, उ0प्र0 इलाहाबाद द्वारा कराया जायेगा।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 23 की उपधारा-1 द्वारा प्रदत्‍त शक्तियों के अनुक्रम में राष्‍ट्रीय अध्‍यापक शिक्षा परिषद की अधिसूचना दि0 23-08-2010 एवं संसोधित अधिसूचना दि0 29-07-2011 के द्वारा कक्षा 1 से 08 तक के शिक्षकों हेतु न्‍यूनतम अर्हता निर्धारित की गई है, जिसके द्वारा शिक्षक के रूप में नियुक्ति हेतु न्‍यूनतम निर्धारित शैक्षिक अर्हता के साथ-2 राज्‍य सरकार द्वारा आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा (UP-TET) या केन्‍द्र सरकार द्वारा आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा ( CTET) उत्‍तीर्ण करना अनिवार्य होगा। उक्‍त परीक्षा का आयोजन प्रत्‍येक जनपद स्‍तर पर आयोजित कराया जायेगा, जिस क्रम में एक समिति का गठन किया गया है।
टी0ई0टी0 का विज्ञापन अप्रैल 2013 माह के अन्तिम सप्‍ताह में कराया जाना है। सभी आवेदन ऑनलाइन लिये जायेगें, जिस हेतु शासन से बेवसाईट का प्रकाशन एन0आई0सी0 के माध्‍यम से किया जायेगा। परीक्षा का आयोजन वर्ष में एक बार आयोजित की जायेगी, शासन के निर्देशानुसार एक से अधिक बार भी आयोजित की जा सकती है। उक्‍त प्रमाण पत्र पॉच वर्ष के लिए मान्‍य होगा।
  • यूपीटीईटी-2013 के लिए विज्ञापन इसी महीने के आखिरी हफ्ते में निकाला जाएगा। टीईटी के लिए ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे। आवेदन के लिए तीन हफ्ते का समय मिलेगा। 
  • विज्ञापन के चार सप्ताह बाद परीक्षा होगी और चार सप्ताह में परीक्षा परिणाम घोषित किया जाएगा। 
  • टीईटी के लिए ढाई घंटे का समय दिया जाएगा, यह पिछली बार की अपेक्षा एक घंटे अधिक है। बीएड वाले उच्च प्राइमरी के लिए पात्र होंगे। 
  • भाषा शिक्षकों संस्कृत, अंग्रेजी और उर्दू के लिए अलग से परीक्षा होगी।
  • इस बार टीईटी चार स्तर पर आयोजित की जाएगी। प्राथमिक कक्षा 1 से 5, भाषा शिक्षा प्राथमिक, उच्च प्राथमिक कक्षा 6 से 8 तथा भाषा शिक्षा उच्च प्राथमिक स्तर की होगी। 
  • इसके लिए 50 फीसदी अंक वाले पात्र होंगे। अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, नि:शक्त, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित, भूतपूर्व सैनिक (स्वयं) को 5 प्रतिशत अंक में छूट होगी। 
  • इसके लिए सभी प्रश्न बहुविकल्पीय होंगे और चार विकल्प होंगे। निगेटिव मार्किंग नहीं की जाएगी। अनुसूचित जाति, जनजाति के लिए आवेदन शुल्क 150 और अन्य के लिए 300 होगा। 
  • .शुल्क ई चालान से बैंकों में जमा किए जाएंगे। अलग-अलग परीक्षा के लिए अलग-अलग शुल्क देने होंगे। नि:शक्तों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
  • टीईटी में 60 प्रतिशत अंक पाने वाला पास माना जाएगा। अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित और भूतपूर्व सैनिक स्वयं तथा नि:शक्त को 55 प्रतिशत पर पास माना जाएगा। 
  • टीईटी आयोजित कराने के लिए जिला स्तर पर जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में कमेटी बनाई जाएगी। यह केवल पात्रता परीक्षा होगी। टीईटी पास करने वाला केवल भर्ती प्रक्रिया के लिए पात्र होगा। 
  • टीईटी रोजगार का अधिकार नहीं देता है। इसका प्रमाण पत्र पांच साल के लिए वैध होगा। इसके खोने पर 300 रुपये जमा करके नया प्राप्त किया जा सकेगा।
  • कक्षा 1 से 5 तक: स्नातक के साथ बीटीसी, विशिष्ट बीटीसी, शिक्षा शास्त्र (विशेष शिक्षा), डीएड, सीटी नर्सरी, एनटीटी, दो वर्षीय बीटीसी उर्दू, 11 अगस्त 1997 से पूर्व मोअल्लिम-ए-उर्दू उपाधिधारक (केवल उर्दू शिक्षक के लिए) व एएलएड।
  • कक्षा 6 से 8 तक: स्नातक के साथ बीटीसी, शिक्षा शास्त्र (विशेष शिक्षा), बीएड विशेष शिक्षा, बीएड, बीएससीएड, बीएएड, बीएलएड।
  • भाषा शिक्षा संस्कृत तथा अंग्रेजी कक्षा 1 से 5 तक: स्नातक के साथ बीटीसी, शिक्षा शास्त्र (विशेष शिक्षा), डीएड, सीटी नर्सरी तथा एनटीटी।
  • भाषा शिक्षा कक्षा 6 से 8 तक संस्कृत तथा अंग्रेजी: स्नातक के साथ बीटीसी, सीटी नर्सरी, शिक्षा शास्त्र (विशेष शिक्षा), बीएड विशेष शिक्षा व बीएड। 
  • उर्दू भाषा शिक्षा कक्षा 1 से 5 तक: उर्दू विषय में स्नातकोत्तर परीक्षा उत्तीर्ण, बीटीसी, दो वर्षीय बीटीसी उर्दू, अलीगढ़ मुस्लिम विवि से डिप्लोमा इन टीचिंग तथा 11 अगस्त 1997 के पूर्व मोअल्लिम-ए-उर्दू उपाधिधारक।
  • उर्दू भाषा शिक्षा कक्षा 6 से 8 तक: उर्दू में स्नातकोत्तर, बीटीसी, बीटीसी उर्दू विशेष प्रशिक्षण, अलीगढ़ मुस्लिम विवि से डिप्लोमा इन टीचिंग तथा 11 अगस्त 1997 से पूर्व मोअल्लिम वाले। 








Friday, April 19, 2013

good news


अब टीईटी का फोटोयुक्त प्रमाणपत्र
फर्जीवाड़ा कर आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ होगी विधिक कार्रवाई
लखनऊ। शक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के लिए इस बार दागदार छवि वाले स्कूलों को परीक्षा केंद्र न बनाए जाने का फैसला लिया गया है। शासन ने अच्छी छवि और पर्याप्त संस्थागत सुविधाओं वाले राजकीय और सहायता प्राप्त विालयों अथवा महाविालयों को ही परीक्षा केंद्र बनाए जाने का निर्देश दिया है। यह भी कहा गया है कि अपरिहार्य परिस्थितियों में वित्तविहीन मान्यता प्राप्त विालयों को औचित्य सिद्ध होने पर परीक्षा केंद्र बनाया जाएगा। इसके अलावा परीक्षा केंद्रों का निर्धारण यथा संभव शहरी क्षेत्र में कराया जाएगा ताकि सुरक्षा की समुचित व्यवस्था की जा सके। नकल रोकने का दायित्व जिलाधिकारियों का होगा।फर्जीवाड़ा -कर आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ होगी विधिक कार्रवाई

UPTET : अब प्राइमरी में नहीं पढाएंगे बीएड डिग्रीधारक



Thursday, April 18, 2013



UPTET : अब प्राइमरी में नहीं पढाएंगे बीएड डिग्रीधारक

अब प्राइमरी में नहीं पढाएंगे बीएड डिग्रीधारक
टीईटी में नहीं मिलेगा मौका
- एनसीटीई की समयसीमा को देख किया फैसला

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जागरण ब्यूरो, लखनऊ : प्रदेश में होने वाली प्राथमिक स्तर की अध्यापक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में अब बीएड डिग्रीधारक नहीं शामिल होंगे। टीईटी के आयोजन को लेकर यहां कल हुई बैठक में बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी मार्गदर्शी सिद्धांतों में यह प्रावधान किया गया है

नये मार्गदर्शी सिद्धांतों में कक्षा एक से पांच के लिए प्राथमिक स्तर पर टीईटी के अभ्यर्थियों की जो शैक्षिक योग्यता तय की गई है, उसमें बीएड डिग्रीधारकों को नहीं शामिल किया गया है। वहीं उच्च प्राथमिक कक्षाओं के लिए टीईटी में 50 प्रतिशत अंकों के साथ बीएड उत्तीर्ण करने वालों को भी मौका दिया गया है। गौरतलब है 2011 में प्राथमिक स्तर पर आयोजित गई टीईटी में 50 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक और बीएड उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों को मौका दिया गया था

शासन ने प्राथमिक स्तर की टीईटी में बीएड डिग्रीधारकों को शामिल न करने का फैसला राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की निर्धारित समयसीमा पर किया। एनसीटीई ने 23 अगस्त 2010 को जो अधिसूचना जारी की थी उसमें कहा गया था कि पहली जनवरी 2012 तक कक्षा एक से पांच तक में टीईटी उत्तीर्ण वे अभ्यर्थी भी शिक्षक नियुक्त हो सकते हैं जिन्होंने 50 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक व बीएड की योग्यता हासिल की हो। शर्त के अनुसार अभ्यर्थियों को नियुक्ति के बाद एनसीटीई से मान्यताप्राप्त छह माह का विशेष प्रशिक्षण पूरा करना था। इसी कारण शासन ने 13 नवंबर 2011 को आयोजित प्राथमिक स्तर की टीईटी परीक्षा में बीएड डिग्रीधारकों को मौका दिया था जिसमें 2.92 लाख अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए

राज्य सरकार के अनुरोध पर एनसीटीई ने बीएड डिग्रीधारकों को प्राथमिक कक्षाओं में शिक्षक नियुक्त करने की समयसीमा को 31 मार्च 2014 तक बढ़ा दिया। चूंकि प्राथमिक स्तर पर शिक्षकों की भर्ती के लिए टीईटीउत्तीर्ण बीएड डिग्रीधारक अभ्यर्थी बड़ी संख्या में उपलब्ध हैं जिन्हें शासन के लिए 31 मार्च 2014 तक शिक्षक नियुक्त कर पाना संभव नहीं होगा। लिहाजा शासन ने भविष्य में आयोजित होने वाली प्राथमिक स्तर की टीईटी में बीएड डिग्रीधारकों को शामिल न करने का फैसला किया है।

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ये हो सकेंगे परीक्षा में शामिल

नये मार्गदर्शी सिद्धांत के अनुसार प्राथमिक स्तर की टीईटी में 50 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक करने वाले तथा बीटीसी या एनसीटीई/भारतीय पुनर्वास परिषद से शिक्षा शास्त्र (विशेष शिक्षा) में दो वर्षीय डिप्लोमा या सीटी (नर्सरी)/नर्सरी टीचर ट्रेनिंग (एनटीटी) या स्नातक तथा विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण/दो वर्षीय बीटीसी उर्दू विशेष प्रशिक्षण/अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से डिप्लोमा इन टीचिंग उत्तीर्ण/11 अगस्त 1997 के पूर्व के मोअल्लिम-ए-उर्दू उपाधिधारक (उर्दू शिक्षक के लिए) या चार वर्षीय प्रारंभिक शिक्षा शास्त्र में स्नातक (बीएलएड) उत्तीर्ण अभ्यर्थी शामिल हो सकते हैं


News Source / Sabhaar : Jagran (Updated on: Thu, 18 Apr 2013 09:01 AM (IST))
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Matter is highly COMPLICATED (JATIL ) for B. Ed 2012 Candidates.
If this Guidelines followed - B. Ed candidates are eligible till 1st Jan.2012

But it is a Good News for UPTET 2011 candidates as they are highly confused and have fear that there seats may not fill by new B.Ed UPTET Qualified candidates.

UPTET : टीईटी सभी के लिए अनिवार्य


UPTET : टीईटी सभी के लिए अनिवार्य

फुल बेंच के सामने एनसीटीई ने दिया स्पष्टीकरण

टीईटी की अनिवार्यता पर बहस पूरी, आदेश सुरक्षित

इलाहाबाद(ब्यूरो)। टीईटी सभी के लिए अनिवार्य है। एनसीटीई ने किसी भी वर्ग को इससे छूट नहीं दी है। स्नातक बीएड डिग्री धारकों को भी इस अर्हता से मुक्त नहीं रखा गया है। सहायक अध्यापक भर्ती में टीईटीकी अनिवार्यता के प्रश्न पर सुनवाई कर रही फुल बेंच के सामने एनसीटीई ने यह स्पष्टीकरण दिया है। एनसीटीई के अधिवक्ता रिज़वान अली अख्तर ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि 23 अगस्त 2010 को जारी अधिसूचना के प्रथम प्रस्तर में ही यह स्पष्ट कर दिया गया है कि टीईटी अनिवार्य अर्हता है। जहां तक

  प्रस्तर तीन में स्नातक बीएड के संबंध कही गई बात का प्रश्न है उसका अर्थ यह नहीं समझा जाना चाहिए कि उन पर टीईटी की बाध्यता नहीं है। अधिसूचना के पांच पैराग्राफ में पहला अर्हता से संबंधित है तथा शेष चार पैराग्राफ पहले पैराग्राफ की व्याख्या और स्पष्टीकरण है

सुनवाई पूरी होने के बाद फुल बेंच ने अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया है।

बहस के दौरान सरकार के अपर महाधिवक्ता सीबी यादव ने भी कहा कि एनसीटीई का नोटिफिकेशन आने के बाद बेसिक शिक्षा सेवा नियमावली 1981 में संशोधन कर दिया गया है। अब प्राथमिक विद्यालयों मेें टीईटी के बिना कोई नियुक्त नहीं हो सकेगा। हालांकि अपर महाधिवक्ता ने विशिष्ट बीटीसी और बीटीसी अभ्यर्थियों की नियुक्ति के संबंध में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। कहना था कि इस मामले को किसी याचिका में चुनौती नहीं दी गई है। विशिष्ट बीटीसी अभ्यर्थियों ने कहा कि वह प्रशिक्षित हैं और नियुक्ति प्रक्रिया के तहत चयन हुआ है, इसलिए उनको टीईटी से छूट दी जाए। प्रदेश सरकार का कहना था कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम में भी सहायक अध्यापक नियुक्ति के लिए टीईटी होना अनिवार्य है। विशिष्ट बीटीसी 2004 की नियुक्ति को लेकर अधिवक्ता आलोक मिश्र ने कहा कि इनका चयन टीईटी की अनिवार्यता लागू होने से पूर्व हो चुकी थी इसलिए टीईटी पास किए बिना नियुक्ति दी जाए।



News Source / Sabhaar : Amar Ujala (18.4.2013)
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Paragraph 1 -



And NCTE Clears Para 3 is Interpretation and Linked to Para 1 And therefore TET is Must & Qualification for Teachers -

Para 3 -


UPTET 2013 : URDU TET SPECIAL ESSAY EXAM


UPTET 2013 : URDU TET SPECIAL ESSAY EXAM - SIMPLE & EASY TO PASS

See news -

News Source / Sabhaar : Amar Ujala (18.4.2013)

UPTET : टीईटी ः ऑनलाइन होंगे आवेदन


UPTET : अब प्राइमरी में नहीं पढाएंगे बीएड डिग्रीधारक









अब प्राइमरी में नहीं पढाएंगे बीएड डिग्रीधारक
टीईटी में नहीं मिलेगा मौका
- एनसीटीई की समयसीमा को देख किया फैसला


प्रदेश में होने वाली प्राथमिक स्तर की अध्यापक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में अब बीएड डिग्रीधारक नहीं शामिल होंगे। टीईटी के आयोजन को लेकर यहां कल हुई बैठक में बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी मार्गदर्शी सिद्धांतों में यह प्रावधान किया गया है

नये मार्गदर्शी सिद्धांतों में कक्षा एक से पांच के लिए प्राथमिक स्तर पर टीईटी के अभ्यर्थियों की जो शैक्षिक योग्यता तय की गई है, उसमें बीएड डिग्रीधारकों को नहीं शामिल किया गया है। वहीं उच्च प्राथमिक कक्षाओं के लिए टीईटी में 50 प्रतिशत अंकों के साथ बीएड उत्तीर्ण करने वालों को भी मौका दिया गया है। गौरतलब है 2011 में प्राथमिक स्तर पर आयोजित गई टीईटी में 50 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक और बीएड उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों को मौका दिया गया था

शासन ने प्राथमिक स्तर की टीईटी में बीएड डिग्रीधारकों को शामिल न करने का फैसला राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की निर्धारित समयसीमा पर किया। एनसीटीई ने 23 अगस्त 2010 को जो अधिसूचना जारी की थी उसमें कहा गया था कि पहली जनवरी 2012 तक कक्षा एक से पांच तक में टीईटी उत्तीर्ण वे अभ्यर्थी भी शिक्षक नियुक्त हो सकते हैं जिन्होंने 50 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक व बीएड की योग्यता हासिल की हो। शर्त के अनुसार अभ्यर्थियों को नियुक्ति के बाद एनसीटीई से मान्यताप्राप्त छह माह का विशेष प्रशिक्षण पूरा करना था। इसी कारण शासन ने 13 नवंबर 2011 को आयोजित प्राथमिक स्तर की टीईटी परीक्षा में बीएड डिग्रीधारकों को मौका दिया था जिसमें 2.92 लाख अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए

राज्य सरकार के अनुरोध पर एनसीटीई ने बीएड डिग्रीधारकों को प्राथमिक कक्षाओं में शिक्षक नियुक्त करने की समयसीमा को 31 मार्च 2014 तक बढ़ा दिया। चूंकि प्राथमिक स्तर पर शिक्षकों की भर्ती के लिए टीईटीउत्तीर्ण बीएड डिग्रीधारक अभ्यर्थी बड़ी संख्या में उपलब्ध हैं जिन्हें शासन के लिए 31 मार्च 2014 तक शिक्षक नियुक्त कर पाना संभव नहीं होगा। लिहाजा शासन ने भविष्य में आयोजित होने वाली प्राथमिक स्तर की टीईटी में बीएड डिग्रीधारकों को शामिल न करने का फैसला किया है।

ये हो सकेंगे परीक्षा में शामिल

नये मार्गदर्शी सिद्धांत के अनुसार प्राथमिक स्तर की टीईटी में 50 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक करने वाले तथा बीटीसी या एनसीटीई/भारतीय पुनर्वास परिषद से शिक्षा शास्त्र (विशेष शिक्षा) में दो वर्षीय डिप्लोमा या सीटी (नर्सरी)/नर्सरी टीचर ट्रेनिंग (एनटीटी) या स्नातक तथा विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण/दो वर्षीय बीटीसी उर्दू विशेष प्रशिक्षण/अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से डिप्लोमा इन टीचिंग उत्तीर्ण/11 अगस्त 1997 के पूर्व के मोअल्लिम-ए-उर्दू उपाधिधारक (उर्दू शिक्षक के लिए) या चार वर्षीय प्रारंभिक शिक्षा शास्त्र में स्नातक (बीएलएड) उत्तीर्ण अभ्यर्थी शामिल हो सकते हैं

Thursday, April 18, 2013

दो महीने में शुरू होगी 45 हजार शिक्षकों की भर्ती



इलाहाबाद | हिन्दुस्तान, वरिष्ठ संवाददाता
बेसिक शिक्षा परिषद् से जुड़े लगभग 45 हजार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी |इनमे से बी टी सी ,विशिष्ट बी टी सी और उर्दू बी टी सी प्रशिक्षित 10800 सहायक अध्यापकों की भर्ती का शासनादेश जारी हो चुका है जबकि उर्दू भाषा के चार हजार शिक्षकों की भर्ती को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है | इसके अलावा जूनियर हाई स्कूलों में विज्ञानं व गणित के लगभग 30 हजार सहायक अध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया भी जल्द ही शुरू होने वाली है |बेसिक शिक्षा परिषद् ने 30 हजार शिक्षकों की नियुक्ति का प्रस्ताव अनुमोदन के लिए सरकार को भेज दिया है |
दरअसल 27 जुलाई 2011 को प्रदेश में निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद मुश्किल से तीन साढ़े तीन हजार शिक्षकों की भर्ती हो सकी है ,जबकि स्कूलों में शिक्षकों के आधे से अधिक पड़ खाली पड़े है |पहली बार हुआ टी ई टी विवादों में फसने के कारण प्राइमरी के 72825 सहायक अध्यापको की भर्ती दो दो बार विज्ञापन जारी होने के वावजूद भी पूरी नहीं हो सकी है | नियुक्ति नहीं होने के हालात और बदतर हो जायेंगे | वैसे भी एक जुलाई 13 से पहले प्रदेश भर के लगभग 13 हजार शिकाह्क रिटायर हो जायेंगे | इन परिस्थितियों में सरकार पर आरटीई के प्रावधानों को लागू करने का काफी दबाव है |जूनियर हाई स्कूल के लिए टी ई टी 2011 में ही हो चुकी है और उसे लेकर कोई विवाद नहीं है | सूत्रों के अनुसार प्राथमिक शिक्षकों के टी ई टी का विवाद हल होने के तुरंत बाद शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी जायेगी | फिलहाल अधिकारियों की निगाहें हाई कोर्ट के रुख पर टिकी हुईं हैं |

Wednesday, April 17, 2013


एनसीटीई को न्यूनतम योग्यता निर्धारण का अधिकार नहीं

टीईटी मामले की सुनवाई में अधिवक्ताओं ने दिए तर्क

उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ कर रही है सुनवाई



जागरण ब्यूरो, इलाहाबाद : उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ में मंगलवार को टीईटी प्रकरण को लेकर शुरू हुई बहस में इसकी अनिवार्यता को लेकर सवाल उठे। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि टीईटी शैक्षिक योग्यता नहीं है। इसलिए इसे अनिवार्य नहीं माना जा सकता। एनसीटीई को इसे अनिवार्य करने का अधिकार ही नहीं है। पूर्णपीठ के समक्ष यह बहस जारी रहेगी। अभी सरकार और केंद्र सरकार का पक्ष आना बाकी है।

हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति सुनील अम्बवानी, न्यायमूर्ति एपी शाही तथा न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल की पूर्णपीठ कर रही है। टीईटी को लेकर लगभग तीन दर्जन याचिकाएं दायर हैं। इसमें दो प्रमुख बिंदुओं कि टीईटी अनिवार्य है नहीं और क्या बीएड डिग्रीधारकों को प्रशिक्षण की शर्त पर सहायक अध्यापक नियुक्त किया जा सकता है, पर विचार के लिए मामला पूर्णपीठ को संदर्भित किया गया है। दायर याचिकाओं में कुछ में राज्य सरकार की अधिसूचनाओं को भी चुनौती दी गई है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान वकील राहुल अग्रवाल ने कहा कि एनसीटीई को न्यूनतम योग्यता निर्धारण का अधिकार नहीं है। उन्होंने कई न्यायिक फैसलों का उदाहरण भी दिया। वकील अरविंद श्रीवास्तव ने कहा कि विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षुओं को भी नियुक्ति दी जानी चाहिए। सरकार प्रशिक्षित अभ्यर्थियों की मौजूदगी के बावजूद गैर प्रशिक्षितों की नियुक्ति कर बाद में प्रशिक्षित करना चाहती है।

News Sabhaar : Jagran (17.4.13)
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शिक्षक भर्ती में अदालत की कार्यवाही- 17 को सुनवाई जारी
शिक्षक भारती मामले की सुनवाई के शुरुआत में नॉन टेट वालो को भर्ती में शामिल करने के मामले पर बहस हुई| शिक्षको की गुणवत्ता के लिए टेट को जरुरी बताया| चर्चा हुई कि एक सर्वे के मुताबिक 30 फ़ीसदी से ज्यादा सरकारी स्कूलों के प्राइमरी छात्र ठीक से पढ़ना और लिखना तक नहीं जानते| इतना ही नहीं बी एड पास 95 फ़ीसदी कैंडिडेट अभी भी घर बैठे है| इसीलिए शिक्षक बनने के लिए टेट पास होना जरुरी है| लिहाजा नॉन टेट तो लगभग शिक्षक भर्ती से बाहर होने के आसार है| हालाँकि अंतिम फैसला जारी होने का इन्तजार करना होगा|

उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ में मंगलवार को टीईटी प्रकरण को लेकर शुरू हुई बहस में इसकी अनिवार्यता को लेकर सवाल उठे। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि टीईटी शैक्षिक योग्यता नहीं है। इसलिए इसे अनिवार्य नहीं माना जा सकता। एनसीटीई को इसे अनिवार्य करने का अधिकार ही नहीं है। पूर्णपीठ के समक्ष यह बहस जारी रहेगी। अभी सरकार और केंद्र सरकार का पक्ष आना बाकी है।

हाईकोर्ट में इस मुद्दे की सुनवाई न्यायमूर्ति सुनील अम्बवानी, न्यायमूर्ति एपी शाही तथा न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल की पूर्णपीठ कर रही है। टीईटी को लेकर लगभग तीन दर्जन याचिकाएं दायर हैं। इसमें दो प्रमुख बिंदुओं कि टीईटी अनिवार्य है नहीं और क्या बीएड डिग्रीधारकों को प्रशिक्षण की शर्त पर सहायक अध्यापक नियुक्त किया जा सकता है, पर विचार के लिए मामला पूर्णपीठ को संदर्भित किया गया है। दायर याचिकाओं में कुछ में राज्य सरकार की अधिसूचनाओं को भी चुनौती दी गई है।

मंगलवार को सुनवाई के दौरान अधिवक्ता राहुल अग्रवाल ने कहा कि एनसीटीई को न्यूनतम योग्यता निर्धारण का अधिकार नहीं है। उन्होंने कई न्यायिक फैसलों का उदाहरण भी दिया। दूसरी ओर अधिवक्ता अरविंद श्रीवास्तव ने कहा कि विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षुओं को भी नियुक्ति दी जानी चाहिए। सरकार प्रशिक्षित अभ्यर्थियों की मौजूदगी के बावजूद गैर प्रशिक्षितों की नियुक्ति कर बाद में प्रशिक्षित करना चाहती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा मित्रों को नियुक्त किया जा रहा है और प्रशिक्षित लोगों को नियुक्ति नहीं दी जा रही है।

बहस के बिंदुओं में यह भी सवाल है कि क्या सरकार टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की नियुक्ति के बाद उन्हें प्रशिक्षित करेगी। विशिष्ट बीटीसी धारकों की याचिका में यह तर्क है कि वे पहले से प्रशिक्षित हैं और टीईटी भी उत्तीर्ण हैं। ऐसे में उन्हें प्राथमिकता के आधार पर नियुक्त किया जाना चाहिए। बीटीसी प्रशिक्षितों का तर्क है कि उन्हें प्रशिक्षण ही नियुक्ति के लिए दिया गया है। जिस समय उन्हें प्रशिक्षण दिया गया, उस समय टीईटी की अनिवार्यता नहीं थी। ऐसे में उनके अधिकारों का हनन हो रहा है।

दिन भर चली सुनवाई के दौरान अदालत लोगों से खचाखच भरी रही। इनमें अभ्यर्थी थे तो अधिकारी भी। अधिवक्ताओं की भीड़ भी दिन भर रही। सुनवाई लगातार कई दिन चलने के आसार हैं। आगे चलकर अदालत में एनसीटीई, केंद्र और राज्य सरकार की ओर से अपना पक्ष रखा जा सकता है। इस प्रकरण पर फैसले के बाद प्रदेश में अनिवार्य शिक्षा के कानून को वास्तविक अमलीजामा पहनाया जा सकेगा। साथ ही प्रदेश में 72 हजार सहायक अध्यापकों की नियुक्ति का मार्ग भी प्रशस्त होगा

एनसीटीई को न्यूनतम योग्यता निर्धारण का अधिकार नहीं

टीईटी मामले की सुनवाई में अधिवक्ताओं ने दिए तर्क

उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ कर रही है सुनवाई



जागरण ब्यूरो, इलाहाबाद : उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ में मंगलवार को टीईटी प्रकरण को लेकर शुरू हुई बहस में इसकी अनिवार्यता को लेकर सवाल उठे। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि टीईटी शैक्षिक योग्यता नहीं है। इसलिए इसे अनिवार्य नहीं माना जा सकता। एनसीटीई को इसे अनिवार्य करने का अधिकार ही नहीं है। पूर्णपीठ के समक्ष यह बहस जारी रहेगी। अभी सरकार और केंद्र सरकार का पक्ष आना बाकी है।

हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति सुनील अम्बवानी, न्यायमूर्ति एपी शाही तथा न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल की पूर्णपीठ कर रही है। टीईटी को लेकर लगभग तीन दर्जन याचिकाएं दायर हैं। इसमें दो प्रमुख बिंदुओं कि टीईटी अनिवार्य है नहीं और क्या बीएड डिग्रीधारकों को प्रशिक्षण की शर्त पर सहायक अध्यापक नियुक्त किया जा सकता है, पर विचार के लिए मामला पूर्णपीठ को संदर्भित किया गया है। दायर याचिकाओं में कुछ में राज्य सरकार की अधिसूचनाओं को भी चुनौती दी गई है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान वकील राहुल अग्रवाल ने कहा कि एनसीटीई को न्यूनतम योग्यता निर्धारण का अधिकार नहीं है। उन्होंने कई न्यायिक फैसलों का उदाहरण भी दिया। वकील अरविंद श्रीवास्तव ने कहा कि विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षुओं को भी नियुक्ति दी जानी चाहिए। सरकार प्रशिक्षित अभ्यर्थियों की मौजूदगी के बावजूद गैर प्रशिक्षितों की नियुक्ति कर बाद में प्रशिक्षित करना चाहती है।

News Sabhaar : Jagran (17.4.13)
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शिक्षक भर्ती में अदालत की कार्यवाही- 17 को सुनवाई जारी
शिक्षक भारती मामले की सुनवाई के शुरुआत में नॉन टेट वालो को भर्ती में शामिल करने के मामले पर बहस हुई| शिक्षको की गुणवत्ता के लिए टेट को जरुरी बताया| चर्चा हुई कि एक सर्वे के मुताबिक 30 फ़ीसदी से ज्यादा सरकारी स्कूलों के प्राइमरी छात्र ठीक से पढ़ना और लिखना तक नहीं जानते| इतना ही नहीं बी एड पास 95 फ़ीसदी कैंडिडेट अभी भी घर बैठे है| इसीलिए शिक्षक बनने के लिए टेट पास होना जरुरी है| लिहाजा नॉन टेट तो लगभग शिक्षक भर्ती से बाहर होने के आसार है| हालाँकि अंतिम फैसला जारी होने का इन्तजार करना होगा|

उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ में मंगलवार को टीईटी प्रकरण को लेकर शुरू हुई बहस में इसकी अनिवार्यता को लेकर सवाल उठे। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि टीईटी शैक्षिक योग्यता नहीं है। इसलिए इसे अनिवार्य नहीं माना जा सकता। एनसीटीई को इसे अनिवार्य करने का अधिकार ही नहीं है। पूर्णपीठ के समक्ष यह बहस जारी रहेगी। अभी सरकार और केंद्र सरकार का पक्ष आना बाकी है।

हाईकोर्ट में इस मुद्दे की सुनवाई न्यायमूर्ति सुनील अम्बवानी, न्यायमूर्ति एपी शाही तथा न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल की पूर्णपीठ कर रही है। टीईटी को लेकर लगभग तीन दर्जन याचिकाएं दायर हैं। इसमें दो प्रमुख बिंदुओं कि टीईटी अनिवार्य है नहीं और क्या बीएड डिग्रीधारकों को प्रशिक्षण की शर्त पर सहायक अध्यापक नियुक्त किया जा सकता है, पर विचार के लिए मामला पूर्णपीठ को संदर्भित किया गया है। दायर याचिकाओं में कुछ में राज्य सरकार की अधिसूचनाओं को भी चुनौती दी गई है।

मंगलवार को सुनवाई के दौरान अधिवक्ता राहुल अग्रवाल ने कहा कि एनसीटीई को न्यूनतम योग्यता निर्धारण का अधिकार नहीं है। उन्होंने कई न्यायिक फैसलों का उदाहरण भी दिया। दूसरी ओर अधिवक्ता अरविंद श्रीवास्तव ने कहा कि विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षुओं को भी नियुक्ति दी जानी चाहिए। सरकार प्रशिक्षित अभ्यर्थियों की मौजूदगी के बावजूद गैर प्रशिक्षितों की नियुक्ति कर बाद में प्रशिक्षित करना चाहती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा मित्रों को नियुक्त किया जा रहा है और प्रशिक्षित लोगों को नियुक्ति नहीं दी जा रही है।

बहस के बिंदुओं में यह भी सवाल है कि क्या सरकार टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की नियुक्ति के बाद उन्हें प्रशिक्षित करेगी। विशिष्ट बीटीसी धारकों की याचिका में यह तर्क है कि वे पहले से प्रशिक्षित हैं और टीईटी भी उत्तीर्ण हैं। ऐसे में उन्हें प्राथमिकता के आधार पर नियुक्त किया जाना चाहिए। बीटीसी प्रशिक्षितों का तर्क है कि उन्हें प्रशिक्षण ही नियुक्ति के लिए दिया गया है। जिस समय उन्हें प्रशिक्षण दिया गया, उस समय टीईटी की अनिवार्यता नहीं थी। ऐसे में उनके अधिकारों का हनन हो रहा है।

दिन भर चली सुनवाई के दौरान अदालत लोगों से खचाखच भरी रही। इनमें अभ्यर्थी थे तो अधिकारी भी। अधिवक्ताओं की भीड़ भी दिन भर रही। सुनवाई लगातार कई दिन चलने के आसार हैं। आगे चलकर अदालत में एनसीटीई, केंद्र और राज्य सरकार की ओर से अपना पक्ष रखा जा सकता है। इस प्रकरण पर फैसले के बाद प्रदेश में अनिवार्य शिक्षा के कानून को वास्तविक अमलीजामा पहनाया जा सकेगा। साथ ही प्रदेश में 72 हजार सहायक अध्यापकों की नियुक्ति का मार्ग भी प्रशस्त होगा

एनसीटीई को न्यूनतम योग्यता निर्धारण का अधिकार नहीं

टीईटी मामले की सुनवाई में अधिवक्ताओं ने दिए तर्क

उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ कर रही है सुनवाई



जागरण ब्यूरो, इलाहाबाद : उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ में मंगलवार को टीईटी प्रकरण को लेकर शुरू हुई बहस में इसकी अनिवार्यता को लेकर सवाल उठे। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि टीईटी शैक्षिक योग्यता नहीं है। इसलिए इसे अनिवार्य नहीं माना जा सकता। एनसीटीई को इसे अनिवार्य करने का अधिकार ही नहीं है। पूर्णपीठ के समक्ष यह बहस जारी रहेगी। अभी सरकार और केंद्र सरकार का पक्ष आना बाकी है।

हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति सुनील अम्बवानी, न्यायमूर्ति एपी शाही तथा न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल की पूर्णपीठ कर रही है। टीईटी को लेकर लगभग तीन दर्जन याचिकाएं दायर हैं। इसमें दो प्रमुख बिंदुओं कि टीईटी अनिवार्य है नहीं और क्या बीएड डिग्रीधारकों को प्रशिक्षण की शर्त पर सहायक अध्यापक नियुक्त किया जा सकता है, पर विचार के लिए मामला पूर्णपीठ को संदर्भित किया गया है। दायर याचिकाओं में कुछ में राज्य सरकार की अधिसूचनाओं को भी चुनौती दी गई है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान वकील राहुल अग्रवाल ने कहा कि एनसीटीई को न्यूनतम योग्यता निर्धारण का अधिकार नहीं है। उन्होंने कई न्यायिक फैसलों का उदाहरण भी दिया। वकील अरविंद श्रीवास्तव ने कहा कि विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षुओं को भी नियुक्ति दी जानी चाहिए। सरकार प्रशिक्षित अभ्यर्थियों की मौजूदगी के बावजूद गैर प्रशिक्षितों की नियुक्ति कर बाद में प्रशिक्षित करना चाहती है।

News Sabhaar : Jagran (17.4.13)
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शिक्षक भर्ती में अदालत की कार्यवाही- 17 को सुनवाई जारी
शिक्षक भारती मामले की सुनवाई के शुरुआत में नॉन टेट वालो को भर्ती में शामिल करने के मामले पर बहस हुई| शिक्षको की गुणवत्ता के लिए टेट को जरुरी बताया| चर्चा हुई कि एक सर्वे के मुताबिक 30 फ़ीसदी से ज्यादा सरकारी स्कूलों के प्राइमरी छात्र ठीक से पढ़ना और लिखना तक नहीं जानते| इतना ही नहीं बी एड पास 95 फ़ीसदी कैंडिडेट अभी भी घर बैठे है| इसीलिए शिक्षक बनने के लिए टेट पास होना जरुरी है| लिहाजा नॉन टेट तो लगभग शिक्षक भर्ती से बाहर होने के आसार है| हालाँकि अंतिम फैसला जारी होने का इन्तजार करना होगा|

उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ में मंगलवार को टीईटी प्रकरण को लेकर शुरू हुई बहस में इसकी अनिवार्यता को लेकर सवाल उठे। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि टीईटी शैक्षिक योग्यता नहीं है। इसलिए इसे अनिवार्य नहीं माना जा सकता। एनसीटीई को इसे अनिवार्य करने का अधिकार ही नहीं है। पूर्णपीठ के समक्ष यह बहस जारी रहेगी। अभी सरकार और केंद्र सरकार का पक्ष आना बाकी है।

हाईकोर्ट में इस मुद्दे की सुनवाई न्यायमूर्ति सुनील अम्बवानी, न्यायमूर्ति एपी शाही तथा न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल की पूर्णपीठ कर रही है। टीईटी को लेकर लगभग तीन दर्जन याचिकाएं दायर हैं। इसमें दो प्रमुख बिंदुओं कि टीईटी अनिवार्य है नहीं और क्या बीएड डिग्रीधारकों को प्रशिक्षण की शर्त पर सहायक अध्यापक नियुक्त किया जा सकता है, पर विचार के लिए मामला पूर्णपीठ को संदर्भित किया गया है। दायर याचिकाओं में कुछ में राज्य सरकार की अधिसूचनाओं को भी चुनौती दी गई है।

मंगलवार को सुनवाई के दौरान अधिवक्ता राहुल अग्रवाल ने कहा कि एनसीटीई को न्यूनतम योग्यता निर्धारण का अधिकार नहीं है। उन्होंने कई न्यायिक फैसलों का उदाहरण भी दिया। दूसरी ओर अधिवक्ता अरविंद श्रीवास्तव ने कहा कि विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षुओं को भी नियुक्ति दी जानी चाहिए। सरकार प्रशिक्षित अभ्यर्थियों की मौजूदगी के बावजूद गैर प्रशिक्षितों की नियुक्ति कर बाद में प्रशिक्षित करना चाहती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा मित्रों को नियुक्त किया जा रहा है और प्रशिक्षित लोगों को नियुक्ति नहीं दी जा रही है।

बहस के बिंदुओं में यह भी सवाल है कि क्या सरकार टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की नियुक्ति के बाद उन्हें प्रशिक्षित करेगी। विशिष्ट बीटीसी धारकों की याचिका में यह तर्क है कि वे पहले से प्रशिक्षित हैं और टीईटी भी उत्तीर्ण हैं। ऐसे में उन्हें प्राथमिकता के आधार पर नियुक्त किया जाना चाहिए। बीटीसी प्रशिक्षितों का तर्क है कि उन्हें प्रशिक्षण ही नियुक्ति के लिए दिया गया है। जिस समय उन्हें प्रशिक्षण दिया गया, उस समय टीईटी की अनिवार्यता नहीं थी। ऐसे में उनके अधिकारों का हनन हो रहा है।

दिन भर चली सुनवाई के दौरान अदालत लोगों से खचाखच भरी रही। इनमें अभ्यर्थी थे तो अधिकारी भी। अधिवक्ताओं की भीड़ भी दिन भर रही। सुनवाई लगातार कई दिन चलने के आसार हैं। आगे चलकर अदालत में एनसीटीई, केंद्र और राज्य सरकार की ओर से अपना पक्ष रखा जा सकता है। इस प्रकरण पर फैसले के बाद प्रदेश में अनिवार्य शिक्षा के कानून को वास्तविक अमलीजामा पहनाया जा सकेगा। साथ ही प्रदेश में 72 हजार सहायक अध्यापकों की नियुक्ति का मार्ग भी प्रशस्त होगा

uptet




UPTET 

: संबद्ध प्राइमरी स्कूलों में भी अनिवार्य हुआ टीईटी
: जागरण  

 माध्यमिक शिक्षा विभाग से संबद्ध सहायता प्राप्त प्राइमरी स्कूलों में भी अब टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) अनिवार्य हो गया है। इन स्कूलों में रिक्त शिक्षक पदों पर अब टीईटी उत्तीर्ण आवेदकों की ही नियुक्ति होगी। शासन ने इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं।

ताजनगरी में माध्यमिक शिक्षा विभाग से संबद्ध 38 सहायता प्राप्त स्कूल ऐसे हैं, जिनमें प्राइमरी कक्षाओं का संचालन होना है। इनमें 21 बालक और 17 बालिका स्कूल हैं। इनमें अभी तक बीटीसी या बीएड किए हुए आवेदकों की नियुक्ति शिक्षक पदों पर होती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा। माध्यमिक शिक्षा विभाग से संबद्ध सहायता प्राप्त प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए शासन ने नई अर्हता निर्धारित की है।

आवेदक के लिए किसी मान्यता प्राप्त विवि से स्नातक, बीटीसी या बीएड प्रशिक्षित होने के साथ ही टीईटी सेंट्रल टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (सीटीईटी) पास होना अनिवार्य होगा। सचिव पार्थसारथी सेन शर्मा ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक को शिक्षकों की भर्ती में अहर्ताओं का ध्यान रखने को पत्र भेजा है।

डीआइओएस राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि प्राइमरी कक्षाओं का संचालन कर रहे स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती में शासन के निर्देशों का पालन किया जाएगा।

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बेकार हो जाएंगे आवेदन

प्राइमरी कक्षाओं का संचालन कर रहे स्कूलों में रिक्त शिक्षक पदों पर नियुक्ति के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग में इन दिनों आवेदन पत्र जमा हो रहे हैं। शासन द्वारा शिक्षक भर्ती में टीईटी या सीटीईटी अनिवार्य करने के बाद अब इनमें से कई आवेदन पत्र बेकार हो जाएंगे। जब नियुक्ति के लिए आवेदन मांगे गए थे, तब टीईटी का आदेश जारी नहीं हुआ था

new job


UPTET / CTET : 

दस हजार शिक्षकों की भर्ती के लिए आवेदन इसी माह

टीईटी व सीटीईटी उत्तीर्ण ही पात्र होंगे


लखनऊ (ब्यूरो)। परिषदीय स्कूलों में 10,800 सहायक अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया इसी माह शुरू हो जाएगी। इसके लिए बीटीसी, विशिष्ट बीटीसी व दो वर्षीय उर्दू प्रवीणताधारी प्रशिक्षण प्राप्त और टीईटी व सीटीईटी उत्तीर्ण ही पात्र होंगे। भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे। इसके लिए शीघ्र ही शासनादेश जारी करने की तैयारी है। भर्ती प्रक्रिया 30 जून तक पूरी करते हुए जुलाई में तैनाती दे दी जाएगी।
बेसिक शिक्षा परिषद सचिव कार्यालय इलाहाबाद ने बीटीसी, विशष्ट बीटीसी और दो वर्षीय उर्दू प्रवीणताधारी प्रशिक्षितों को सहायक अध्यापक के पद पर तैनाती देने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा था। प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा सुनील कुमार ने इस पदों पर भर्ती की अनुमति 12 मार्च को दी थी। इसके आधार पर अब भर्ती प्रक्रिया शुरू होनी है। बेसिक शिक्षा परिषद सचिव कार्यालय इलाहाबाद ने भर्ती कार्यक्रम का प्रस्ताव भेजा था, जिस पर सहमति बन गई है। अब इसके आधार पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के लिए शासनादेश जारी करने की तैयारी है

Tuesday, April 16, 2013

non tet is out

BY TODAY'S COURT VIEW NON-TET IS TOTALLY OUT. 
A.p.shahi ji aur unki team ne sanyukt roop se tet ke tulna NET se karte huye kaha ki jis tarah m.phil, m.a. karne ke uprant lectr ki job karne ke liye net jaroori hai thik usi tarah sahayak adhyapak ki job ke liye tet pas hona aniwarya hai. A.p.shahi ji ne is line ko kai bar dohraya ki NET sirf ek national eligibilty test hai jo ki essential qualification hai jo apko sirf qualified lectr ki job ke liye banati hai bad me university ya institution apko job basis criteria tay karti hai thik usi tarah TET bhi sirf ek patrata pariksha hai. tet pass hona matra job ki gurantee nahi hai. ye sirf ek minimum essential qualification hai jo ki sahayak adhyapk ke pad ke liye awasyak hai. isi bases pe unhone siksha mitro ko tet pas hona anivarya bataya for appointment to sahayak adhyapak.. aj lunch ke bad pura waqt 2004,2005. etc anya batch ke sbtc ladko ko tet se choot ke liye bahas chalti rahi. per judes panel ke rukh se nahi lagta ki unhe tet se mukti milegi. aj koi bhi case db me transfer nahi huwa hai. ntet wale matter pe faisla surakshit kar liya gaya hai. last bat yahi kahunga ki a.p.shahi ji ne tet ko sirf ek patrata pariksha mana hai aur ye line base of selection pe kitna prabhaw dalegi ye to aane wala waqt batayega. COURT WILL BE CONTINUE 2MORROW..
BY TODAY'S COURT VIEW NON-TET IS TOTALLY OUT. A.p.shahi ji aur unki team ne sanyukt roop se tet ke tulna NET se karte huye kaha ki jis tarah m.phil, m.a. karne ke uprant lectr ki job karne ke liye net jaroori hai thik usi tarah sahayak adhyapak ki job ke liye tet pas hona aniwarya hai. A.p.shahi ji ne is line ko kai bar dohraya ki NET sirf ek national eligibilty test hai jo ki essential qualification hai jo apko sirf qualified lectr ki job ke liye banati hai bad me university ya institution apko job basis criteria tay karti hai thik usi tarah TET bhi sirf ek patrata pariksha hai. tet pass hona matra job ki gurantee nahi hai. ye sirf ek minimum essential qualification hai jo ki sahayak adhyapk ke pad ke liye awasyak hai. isi bases pe unhone siksha mitro ko tet pas hona anivarya bataya for appointment to sahayak adhyapak.. aj lunch ke bad pura waqt 2004,2005. etc anya batch ke sbtc ladko ko tet se choot ke liye bahas chalti rahi. per judes panel ke rukh se nahi lagta ki unhe tet se mukti milegi. aj koi bhi case db me transfer nahi huwa hai. ntet wale matter pe faisla surakshit kar liya gaya hai. last bat yahi kahunga ki a.p.shahi ji ne tet ko sirf ek patrata pariksha mana hai aur ye line base of selection pe kitna prabhaw dalegi ye to aane wala waqt batayega. COURT WILL BE CONTINUE 2MORROW..

Thursday, April 4, 2013


UPTET : शिक्षक भर्ती में सुनवाई की अगली तारीख 16 अप्रैल, नान टेट वाले 12 को देंगे जबाव


UPTET : शिक्षक भर्ती में सुनवाई की अगली तारीख 16 अप्रैल, नान टेट वाले 12 को देंगे जबाव

सूत्रों के अनुसार -
 उत्तर प्रदेश चल रही 72000 प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती के मामला अभी हाईकोर्ट में और लम्बा खिंचता दिखायी दे रहा है। बीएड बेरोजगारों को अभी शिक्षक पद पर भर्ती होने के लिए इंतजार करना पड़ेगा। जानकारी के अनुसार सुनवाई की अगली तारीख 16 अप्रैल बतायीगयी है। नान टेट वाले 12 अप्रैल को जबाव देंगे।


कुछ अभ्यार्थीयों का सोचना है कि ये विज्ञापन पूर्व वर्ती सरकार ने निकाला था इसलिए
राजनीती एक कारण हो सकता है
,आखिर मेहनती / इमानदार छात्रों का क्या कसूर था कि उन्हें टी ई टी परीक्षा में अच्छे अंक लाने पर भी  भी सजा भुगतनी पड़ रही है


प्राइमरी स्कूलों का हाल किसी को शायद दिखायी नहीं देता जहां गरीब व बेसहारा बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इन ग्रामीण इलाकोंमें स्थित प्राइमरी स्कूलों में सरकार द्वारा 1 अप्रैल से भले ही शिक्षा का अधिकार अधिनियमपूर्णतः लागू किये जाने की घोषणा कर दी हो लेकिन उसके लिए तैयारियां मात्र कागजों पर ही हैं। हकीकत में प्राइमरी स्कूलों में बच्चों को शिक्षा दिलाने के लिए पर्याप्त मात्रा में शिक्षक नहीं है। प्रदेश शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है। लेकिन सरकार द्वारा बीएड पास अभ्यर्थियों सेआवेदनों के नाम पर मोटी फीस तो गटक ली गयी लेकिन भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर अदालती कार्यवाही में उलझ गयी।
पिछली बसपा सरकार में 2011 में टीईटी परीक्षा करायी गयी। उस समय सरकार द्वारा निर्णय लिया गया कि

टीईटी परीक्षा के आधार पर ही शिक्षकों की भर्ती की जायेगी। जिसके लिए शिक्षक नियमावली में संशोधन कर भर्ती प्रक्रिया अंतिम दौर तक पहुंच गयी। लेकिन सरकार बदलने के बाद समाजवादी पार्टी की सरकार ने पिछली पूरी भर्ती प्रक्रिया निरस्त कर दोबारा आवेदन मांग लिये। अब सरकार बदलने के साथ ही बीएड बेरोजगार अभ्यर्थी लुट रहे हैं और अदालत की वाट जोह रहे हैं। आखिर कब होगा बीएड बेरोजगारों के साथ न्याय? यह प्रश्न बरोजगारों के मन में रात दिन कौंध रहा है